माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पटवारखाने का बिजली कनेक्शन चौथे दिन भी नहीं जुड़ सका। जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे की जवाबदेही बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
नायब तहसीलदार राजेश खुराना का कहना है कि बकाया बिल के भुगतान के लिए प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि कानूनगो की एक कमेटी गठित है, जो बिल जमा कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करती है और संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर शीघ्र समाधान निकालेगी। वहीं कानूनगो रमेश का कहना है कि पटवारखाने के बिजली बिल का भुगतान जिला प्रशासन को करना चाहिए। उनका तर्क है कि यह व्यय प्रशासनिक मद से संबंधित है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी उच्च स्तर पर तय होनी चाहिए।
शनिवार को अवकाश होने के कारण राजस्व कार्य प्रभावित नहीं हुए लेकिन पिछले तीन दिनों से कामकाज पूरी तरह ठप रहने से 600 से अधिक इंतकाल लंबित हो चुके हैं। मुख्य कारण यह है कि 6.59 लाख रुपये के बकाया बिजली बिल का भुगतान कौन करेगा इस पर अधिकारी एकमत नहीं हो पा रहे। बिजली निगम ने बुधवार को बकाया न चुकाने पर कनेक्शन काट दिया था। इसके बाद से ऑनलाइन सेवाएं, दस्तावेजों की एंट्री, रिकॉर्ड अपडेट और इंतकाल की प्रक्रिया बंद पड़ी है।
सोमवार तक नहीं हुआ समाधान तो बढ़ेगी परेशानी
सोमवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो परेशानी बढ़ सकती है। पटवारियों का कहना है कि जब तक भुगतान को लेकर स्पष्ट आदेश नहीं होंगे, बिजली बहाल होना संभव नहीं दिखता। यदि जल्द अधिकारी यह तय नहीं कर सके कि कौन बिल का भुगतान करेगा तो लंबित इंतकाल की संख्या और बढ़ सकती है। राजस्व मामलों में देरी से जमीन मालिकों, खरीदारों और किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है।
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पटवारखाना जिला राजस्व कार्यालय के अधीन कार्यरत है। इसका विद्युत बिल जमा कराए जाने के लिए जिला राजस्व अधिकारी की ओर से निदेशक भूमि अभिलेख को पत्र लिखा जा चुका है। बजट प्राप्त होते ही संबंधित विद्युत बिल का भुगतान करा दिया जाएगा। उक्त प्रकरण को उपायुक्त के संज्ञान में भी लाया जा रहा है ताकि इस विषय पर त्वरित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। - प्रदीप कुमार, एसडीएम, करनाल