करनाल। अधिकारियों की लापरवाही से कब सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आरक्षित दशहरा मैदान अवैध रूप से रेत, बजरी की बिक्री का अड्डा बन गया किसी को पता भी नहीं चला।
सेक्टर-4 के दशहरा मैदान में आहिस्ता-आहिस्ता ठेकेदारों ने अपना एक-दो ढेरियों से शुरू किया कारोबार पूरे मैदान में फैला दिया। करोड़ों की सरकारी जमीन पर कारोबार धड़ल्ले से चलता रह। यह खुलासा शुक्रवार को तब हुआ जब मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने मैदान पर दस्तक दी।
रावण दहन कार्यक्रम के लिए रखे गए 10 एकड़ के इस मैदान में दूर-दूर तक भवन निर्माण सामग्री की ढेरियां अनाज मंडी की तर्ज पर पसरी दिखी। लेकिन इस मैदान की देखरेख करने वाले हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारी अब तक इससे आंखें मूंदे रहे। यह हालात भी तब हैं, जब शहर में बिना अनुमति कहीं भी इनकी जमीन पर होने वाले छोटे आयोजनों में इस महकमे की टीम कार्रवाई के लिए सतर्क रहती है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने जब एचएसवीपी और खनन अधिकारियों को मौके पर बुलाकर हालात दिखाए तो अधिकारियों ने अपना रिकॉर्ड तलाशना शुरू किया। जांच में सामने आया कि किसी भी ठेकेदार ने यहां पर भवन निर्माण सामग्री की बिक्री संबंधित गतिविधियों के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली है।
करीब छह वर्ष से इस मैदान में दशहरा पर्व मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री रहते हुए मनोहर लाल ने इस जमीन को दशहरा मैदान के रूप में आरक्षित करने की घोषणा की थी।
श्री रामलीला सभा की ओर से यहां दशहरा पर्व मनाया जाता है। इसके अलावा राजनीतिक व सांस्कृतिक आयोजन भी इस मैदान में होते हैं।
इधर, एचएसवीपी के एसडीओ सुभाष का कहना है कि जांच के बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अभी तक की जांच में सामने आया कि ठेकेदारों ने कोई अनुमति नहीं ली थी। सेक्टर-4 के स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि दशहरा मैदान में भवन निर्माण सामग्री की बिक्री का कारोबार कई वर्षों से चल रहा है। पहले यह केवल एक दो ढेरी में ही होता था।
स्थानीय निवासी शंकर, सोनू और हरिदत्त ने बताया कि हमें यह नहीं पता था कि यह गतिविधि अवैध तरीके से हो रही है। लेकिन अब यह कारोबार बढ़ गया है। दिनभर सेक्टर में धूल के गुबार उड़ते हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना
एडवोकेट राजकुमार और संदीप राणा का कहना है अधिकारियों की नाक के नीचे इतना बड़ा जाल फैलना संभव नहीं है। इसमें अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है।आरटीए और खनन अधिकारियों की सतर्क रहने का दावा करती है तो यहां यह 10 एकड़ में कारोबार कैसे फैल गया, इसकी भी विजिलेंस से जांच होनी चाहिए। अब ग्रैप-4 लागू हुए एक माह का समय होने को है। फिर भी अधिकारियों को यहां से उड़ते धूल के गुबार क्यों नहीं दिखे।