माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राजकीय स्कूलों में दाखिले के लिए एमआईएस पोर्टल पर परिवार पहचान पत्र का नंबर भी मांगा जा रहा है। इसके कारण कई प्रवासी विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल पा रहा है। प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकार से दाखिलों में परिवार पहचान पत्र की अनिवार्यता हटाने की मांग की है।
इसे लेकर बृहस्पतिवार को संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी को ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों को नुकसान होगा। ऐसे प्रवासी बच्चे जो पढ़ना चाहते हैं, लेकिन परिवार पहचान पत्र न होने के कारण वे पढ़ नहीं पाएंगे।
संघ के जिला प्रधान जगदीश सुल्तानपुर ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून साफ कहता है कि किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की कमी के कारण पढ़ने से नहीं रोका जा सकता। पिछले दिनों विभाग ने बिना किसी सूचना के एमआईएस पोर्टल पर बच्चों की दाखिला संबंधित सभी प्रक्रियाओं को स्कूल लॉगइन से हटाकर टीचर लॉगइन पर शुरू कर दिया। इससे जहां दाखिला संबंधित कार्य बाधित हुआ है। वहीं, अध्यापकों का निजी डाटा लीक व डिलीट होने का भी खतरा बढ़ गया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो शिक्षक आंदोलन शुरू करेंगे।
सरकारी में फीस और निजी में फ्री पढ़ाई निजीकरण को बढ़ावा
महासचिव सुरेश, खंड प्रधान सुरेंद्र, असंध प्रधान सुखबीर और घरौंडा प्रधान सतीश निर्माण का कहना है कि एक तरफ मॉडल संस्कृति स्कूलों के नाम पर अभिभावकों से फीस वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं विभाग अपनी तरफ से फीस देकर सरकारी स्कूलों के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला करवाने के लिए काम कर रहा है। विभाग का यह कदम निजीकरण को बढ़ावा है। सरकारी स्कूलों में संसाधन बढ़ाने के लिए कार्य किया जाना चाहिए।
चार साल से नहीं आई स्टेशनरी की राशि
पूर्व राज्य महासचिव दीपक गोस्वामी ने कहा कि पिछले चार वर्षों से स्टेशनरी, बैग, पुस्तकें व अन्य इनंसेंटिव राशि रुकी हुई है, जिसे तुरंत जारी किया जाना चाहिए। इसी प्रकार गैर शैक्षणिक कार्यों के लिए अध्यापकों पर बेवजह का दबाव बंद होना चाहिए। 2016-19 ब्लॉक ईयर की एलटीएस बजट जारी होने के बावजूद अभी तक कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने इस राशि के भी तुरंत भुगतान की मांग की।