राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक अच्छी खबर है। अब पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को मिड डे मील के साथ दो सौ ग्राम दूध भी मिलेगा। विभाग की ओर से इस योजना को लागू करने के लिए सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से मिड डे मील संसाधनों की रिपोर्ट मांगी है। ताकि स्कूलों में गिलास या दूध गर्म करने के बर्तनों की कमी को पूरा करने के बाद इस योजना को अमल में लाया जा सके।
पूरे जोश और जुनून के साथ इस योजना को लागू करने के लिए तैयारियां तो शुरू कर दी गई है, लेकिन स्कूलों में दूध कहां से आएगा, इसके बारे में अभी तक कोई भी एजेंडा नहीं बना है। प्रदेश में पहले ही दूध की किल्लत से लोग परेशान हैं। ऐसे में अब मिड डे मील में दूध की जरूरत को पूरा करना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है।
केंद्र सरकार की ओर से स्वराज योजना के तहत बच्चों को मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार लाकर कुपोषण से बचाने की दिशा में यह कदम उठाया है। सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा तक बढ़ने वाले बच्चों को मिड डे मील के साथ दो सौ ग्राम दूध देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सरकार ने प्रदेश के स्कूलों से बच्चों की संख्या और मिड डे मील के संसाधनों की रिपोर्ट भी तलब कर ली है। विभाग ने सबसे पहले स्कूलों में बच्चों की संख्या के मुताबिक गिलास, दूध गर्म करने के लिए गैस, टब या अन्य बर्तनों की रिपोर्ट मांगी है। शिक्षा अधिकारी विभाग को मिड डे मील के आंकड़े मुहैया कराने में व्यस्त हैं। हालांकि विभाग ने इस योजना को अमल में लाने के लिए स्कूलों में किसी की जिम्मेवारी तय नहीं की है। ऐसे में इस योजना का फाइनल प्रारूप क्या होगा, दूध कहां से आएगा, दूध की गुणवत्ता जांच कौन करेगा, इसके बारे में अभी तक कोई भी दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
जिले में प्रतिदिन होगी 11 हजार लीटर दूध की खपत
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब 54 हजार है। यदि प्रति विद्यार्थी को दो ग्राम दूध दिया जाए तो स्कूलों में प्रतिदिन 11 हजार लीटर दूध की आवश्यकता होगी। स्कूलों में दूध की आपूर्ति किस एजेंसी के माध्यम से होगी, बच्चों की प्रतिदिन की संख्या व बचे हुए दूध की स्टोरेज व्यवस्था क्या होगी, अभी तक विभाग द्वारा स्कूलों को इस दिशा किसी प्रकार के निर्देश जारी नहीं किए हैं। प्रदेश की दूध के घटते उत्पादन व बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं। यदि सरकार इस योजना को लागू करने में सफल रही तो कुपोषण का शिकार हो रहे बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं प्रदेश में दूध संकट भी हो सकता है। इस योजना की शुरुआत कब होगी इस बारे में अभी कोई भी फाइनल डेट घोषित नहीं हुई है।
वर्जन
अब पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को मिड डे मील के साथ दो ग्राम दूध दिया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में मिड डे मील संसाधनों की कमी को पूरा करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस योजना की शुरुआत कब होगी, अभी तक इस संदर्भ में कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। विभाग से जो भी आदेश होंगे, उसी अनुरूप काम किया जाएगा।
-सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी