- कक्षा पहली से तीसरी व छठी का पाठ्यक्रम बदला, तो किताबें आने में हो रही देरी
- 15 दिनों में हर विद्यालय में पुस्तकें आने का दावा
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा पहली से तीसरी और छठी के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किया गया है। इससे विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा दी जाएगी और उन्हें स्वावलंबी बनने में मदद मिलेगी। इसके चलते स्कूलों में किताबें पहुंचने में देरी हो रही है। हालांकि विभाग ने पहले नए सत्र शुरू होने से पहले ही किताबें देने का दावा किया था, लेकिन यह दावा पूरा नहीं हो पाया। अब आगामी 15 दिनों में हर विद्यालय में सभी कक्षाओं की पुस्तकें आने का आश्वासन अधिकारियों की ओर से दिया जा रहा है।
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत विभाग विद्यार्थियों में कौशल विकास करने के उद्देश्य से पाठ्यक्रम में बदलाव कर रहा है। ऐसे में विभाग ने कक्षा पहली, दूसरी, तीसरी और छठी के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। पहले केवल शिक्षा आधारित पाठ्यक्रम था और अब इसमें परीक्षण संबंधी पाठ्यक्रम लागू किया गया है। इसमें व्यावसायिक शिक्षा, कला शिक्षा, व्यावहारिक शिक्षा आदि तीन मुख्य बिंदु रहेंगे। इनके माध्यम से विद्यार्थी अपना कौशल निखार सकेंगे और आगामी समय में अपना कॅरिअर निर्माण के लिए सही विषय और संकाय का चयन कर पाएंगे।
कक्षा नौवीं तक तीन भाषायी फॉर्मूला लागू
फिलहाल विभाग की ओर से इस सत्र से तीन भाषायी फॉर्मूला लागू लिया गया है। ऐसे में कक्षा छठी से 9वीं तक विभाग ने तीन भाषाओं में से एक भाषा अनिवार्य की है। कक्षा छठी से आठवीं तक विभाग की ओर से संस्कृत भाषा अनिवार्य चल रही है, लेकिन अब विभाग ने इसके अलावा उर्दू, पंजाबी व संस्कृत में से एक भाषा चयन का विकल्प दिया है। अगले सत्र से विभाग की ओर से कक्षा 10वीं में भी यह फॉर्मूला लागू किया जाएगा।
विद्यार्थी सीख सकेंगे अनुवाद
कक्षा छठी से नौवीं तक में तीन भाषायी फॉर्मूला लागू होने से विद्यार्थी तीन भाषाओं में पारंगत होंगे और इसका लाभ उन्हें अनुवाद करने में मिलेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों का समग्र विकास होगा और उनकी समझ में वृद्धि होगी। विद्यालयों में किताबों की देरी से पहुंचने की समस्या पर शिक्षा अधिकारियों ने कहा कि वे इस मुद्दे को जल्द हल करेंगे और विद्यार्थियों की पढ़ाई में कोई व्यवधान नहीं आने देंगे। विद्यार्थियों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
कक्षा पहली से तीसरी व छठी के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव हुआ है। इस कारण से पुस्तकें प्रकाशन में देरी की जानकारी मिली थी। इसी माह में ही प्रत्येक विद्यालय में किताबें पहुंच जाएंगी। कक्षा छठी से 9वीं तक विभाग ने उर्दू, पंजाबी व संस्कृत भाषाओं में से एक भाषा अनिवार्य की है।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी