माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। एक जमाना था जब शिक्षक कक्षा में आता था और पाठ्यक्रम संबंधित जानकारी किताब से पढ़कर छात्रों को बता देता था। इससे उसका काम चल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं चलता। अब पढ़ाने से पहले शिक्षक को खुद भी पढ़ना पड़ता है अन्यथा कक्षा में विद्यार्थियों के उलझाते सवालों का जवाब देना मुश्किल हो जाता है। यह कहना है कर्ण नगरी के राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों का।
अमर उजाला कार्यालय में वीरवार को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में संवाद का आयोजन किया गया। इस दौरान शिक्षकों ने कहा कि आज की नई पीढ़ी डिजिटल प्लेटफार्म पर सक्रिय है और अलग-अलग डिजिटल संसाधनों से ज्ञान लेते हैं। जब वे स्कूल में आते हैं तो इससे आगे की जानकारी संबंधित सवाल करते हैं। इसलिए शिक्षक का अपडेट रहना भी जरूरी है।
कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षक कर्ण कुमार निर्माण, स्टेट अवार्डी विनोद कुमार, राजीव कुमार, सुरेंद्र कुमार, रणधीर कुमार, विनोद कुमार, मामचंद, सतिंद्र कुमार, रणधीर सिंह, डॉ. सुरेंद्र कुमार, रोहताश कुमार, प्रवीन कुमार, मंगल सिंह, महेंद्र सिंह और ममता रानी ने कहा कि शिक्षा का स्तर पहले से काफी सुधरा है और व्यवस्थाएं भी बदली हैं। पढ़ाने के तरीकों में भी बदलाव आया है। ऐसे में शिक्षक को अपडेट रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजकीय स्कूलों में अभी संसाधनों की कमी है। कई जगह भवन जर्जर हैं। इन्हें भी समय के साथ अपग्रेड करने की जरूरत है।
नॉन बोर्ड कक्षाओं में फेल न करने का निर्णय गलत
शिक्षक कृष्ण निर्माण ने कहा कि नॉन बोर्ड कक्षाओं में सभी छात्रों को पास करने की योजना बनाई है। यह गलत है। ऐसा करने से छात्र को लगता है कि वह सही पढ़ रहा है लेकिन जैसे ही बोर्ड कक्षा में वह उसी तरह से प्रदर्शन करता है तो फेल हो जाता है। इस व्यवस्था को बदलते हुए पढ़ाई में सख्ती की जानी चाहिए। विषयों का समायोजन न करके प्रत्येक विषय के शिक्षक की स्कूल में तैनाती हो तो परीक्षा परिणाम भी सुधरेगा।
शिक्षकों ने रखी मांगें
- गैर शैक्षणिक कार्यों के लिए अलग से नियुक्ति की जाएं।
- स्कूलों में केंद्र और प्रदेश सरकार के सेवा नियम समान लागू हों।
- चिराग योजना को बंद करके सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाई जाए।
- विषयों का समायोजन न करके, प्रत्येक विषय के शिक्षक की नियुक्ति हो।
- हर प्राथमिक विद्यालय में कम से कम आठ शिक्षक जरूर हों, इससे छात्र संख्या बढ़ेगी।
- रिक्त पदों पर भर्ती हो, विषयों के विशेषज्ञों की कमी है।
- नए भवन दिए जाए, कई जगह उपकरणों की भी कमी है, चतुर्थ श्रेणी के पदों को भरा जाए।
इन कार्यों की सराहना-
- स्कूलों में ड्यूल डेस्क दिए गए।
- बिजली व्यवस्था पहले से सुधरी है। हर कमरे में पंखे और रोशनी का इंतजाम है।
- स्कूल सुंदरीकरण जैसी प्रतियोगिताओं से स्थिति में सुधार आ रहा है।
- सुपर-100, बुनियाद, एनएसक्यूएफ जैसी योजनाओं से भी शिक्षा का स्तर सुधरा है।