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पांच गांवों के किसानों ने नहीं मनाया दशहरा

Sun, 13 Oct 2013 10:04 PM IST
घरौंडा
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चकबंदी में अपनी जमीन गंवा चुके ग्रामीणों का अनशन सातवें दिन में प्रवेश कर गया। पांच गांवों के पीड़ित परिवारों ने विजयदशमी का पर्व नहीं मनाया। उन्होंने कहा कि जब तक चकबंदी की निष्पक्ष जांच नहीं होती तब तक कोई भी त्योहार नहीं मनाया जाएगा।
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अनशन पर बैठी महिलाओं ने बताया कि अपनी मांगों के लिए सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। वहीं, रविवार को गांव तारपुर की महिलाएं अनशन पर बैठीं। महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

अनशन पर बैठी रोशनी, कविता, कृष्णा, सीता, राममूर्ति, केला, बाला सहित अन्य ने बताया कि चकबंदी की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए सात दिन से अनशन पर बैठी हैं लेकिन अभी तक प्रशासन ने जांच कराने का कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है।
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दूसरे पक्ष के लोगों ने प्रशासन से साथ मिलीभगत करके उनके साथ लड़ाई खड़े लोगाें को धमकी देकर डराने का काम शुरू कर दिया है ताकि अनशन खत्म हो सके। शनिवार देर रात समाजसेवी व आईएसी के सदस्य जेपी शेखपुरा को किसी व्यक्ति ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी है।

 उन्हाेंने कहा कि अगर जेपी शेखपुरा को कुछ हुआ तो पांचों गांवों के लोग सड़कों पर उतर जाएंगे और यातायात को जाम कर देंगे। अहिंसा से चल रहा आंदोलन हिंसा में बदल जाएगा। आंदोलन का संचालन कर रहे प्रदीप मराठा ने कहा कि अपनी मांगों के लिए सोमवार को हजारों महिलाएं व पुरुष दिल्ली के जंतर-मंतर पर कूच करेंगे। वहां पर प्रदर्शन करने के बाद महामहिम के नाम ज्ञापन देंगे। इसके बाद ग्रामीण आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखेंगे।
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