नई अनाज मंडी में गेहूं की आवक जोरों पर है। मंडी में आवक बढ़ने के साथ गोरखधंधा भी जोर पकड़ने लगा है। यहां पर बिना पर्ची के प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल गेहूं की खरीद हो रही है। इसका न तो मार्केट कमेटी के पास कोई रिकार्ड है और न ही सरकार को इस खरीद का शुल्क मिल पा रहा है। इससे सरकार को प्रतिदिन हजारों-लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। प्राइवेट खरीदारों की ओर से जा रही इस खरीद की जानकारी मार्केट कमेटी के अधिकारियों को भी है, लेकिन इस पर रोक लगाने की जगह वे मौन साधे बैठे हैं।
मंडी में एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा के बाद भी यह काम आठ अप्रैल को शुरू हो पाया, हालांकि गेहूं की आवक एक अप्रैल से ही शुरू हो गई थी। सरकारी खरीद शुरू होने से पहले मंडी में हजारों क्विंटल गेहूं पहुंचा, जिनकी खरीद प्राइवेट खरीदारों ने की, लेकिन सिर्फ 700 क्विंटल गेहूं खरीद ही मार्केट कमेटी के रिकार्ड में दर्ज है, जिसका प्राइवेट खरीदारों ने पर्ची कटाई। बाकी का गेहूं कौन खरीदा और कहां गया, किसी को नहीं पता? अब जबकि सरकारी खरीद शुरू हो गई है, तब भी मंडी में सरकार को चपत लगाने का सिलसिला जारी है। मंडी से प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल गेहूं बिना पर्ची कटे बाहर जा रहा है। इससे सरकार को नुकसान हो रहा है। वहीं इस घपलेबाजी में लिप्त अधिकारियों की जेबें भर रही हैं। कुछ आढ़तियों द्वारा मंडी में चल रही इस घपलेबाजी की जानकारी मिलने के बाद शुक्रवार को जब अमर उजाला की टीम ने मंडी का दौरा किया तो आरोपों में सच्चाई नजर आई। टीम केे सामने ही एक प्राइवेट खरीदार बिना पर्ची के गेहूं खरीदकर ट्रैक्टर-ट्राली पर मंडी से बाहर ले गया। इस बारे में मंडी सचिव चंद्रप्रकाश के ऑफिस पहुंच कर उन्हें भी जानकारी दी गई, लेकिन वे इस पर कार्रवाई करने की जगह यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि लोग खाने-पीने के लिए थोड़ा बहुत गेहूं की खरीद कर लेते हैं।
मंडी में खरीद पर सरकार को 4 फीसदी टैक्स
मंडी में गेहूं की खरीद के लिए अधिकारिक रूप से प्राइवेट खरीदारों को मौका नहीं दिया जाता। हालांकि सरकारी खरीद शुरू होने से पहले प्राइवेट खरीदारों को मंडी से खरीद की छूट दी जाती है। मंडी से एजेंसियों की ओर से जो भी गेहूं खरीदा जाता है, उसकी पर्ची बनती है। प्रति सौ रुपये खरीद पर सरकार को चार रुपये मिलता है। इस हिसाब से मंडी के अंदर एक क्विंटल गेहूं की खरीद पर 64 रुपये मिलते हैं। लेकिन अगर कोई प्राइवेट खरीदार बिना पर्ची कटाए गेहूं की खरीद करता है तो उसका पैसा सरकार को नहीं मिलता है।
मंडी के गेटों पर नहीं होती गेट पास की जांच
मंडी में अवैध खरीद-बिक्री रोकने के लिए मंडी के अंदर से गेहूं ले जाने वाले ट्रकों व ट्रैक्टर-ट्रालियों का गेट पास बनाया जाता है। इसकी गेट से बाहर निकलते हुए जांच की जाती है। जांच की यह जिम्मेदारी मार्केट कमेटी पर होती है। करनाल मंडी में इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा रहा है। इसका फायदा उठाकर बिना पर्ची के खरीद करने वाले प्राइवेट खरीदार आराम से मंडी के बाहर निकल जाते हैं। मंडी में दो प्रमुख गेट के साथ एक साइड गेट और एक टूटी हुई जगह है। वहां से ट्रक मंडी के अंदर आते-जाते हैं। इन गेटों पर मार्केट कमेटी के कर्मचारी मंडी के बाहर जाने वाले ट्रकों का गेट पास चेक करते हैं। लेकिन इस बार किसी भी गेट पर मंडी से बाहर जाने वाले ट्रकों के गेट पास की जांच नहीं की जा रही है।
प्राइवेट खरीद रोकने की जिम्मेदारी आढ़तियों पर
इस संबंध में मार्केट सचिव चंद्र प्रकाश से बात की गई तो उन्होंने पहले तो इससे साफ इनकार किया। फिर जब उन्हें बताया गया कि उनके सामने ही बिना पर्ची के प्राइवेट खरीदारी हुई हो तो उन्होंने कहा कि कुछ लोग खाने-पीने के लिए थोड़ा बहुत खरीद लेते हैं। मंडी में जिसके ऊपर हमें शक होता है, तो हम उसकी तुरंत जांच करते हैं। गेट पर कर्मचारियों को बैठने की आवश्यकता नहीं है। मंडी के अंदर आने वाले गेहूं का रिकार्ड हमारे पास होता है। यदि आढ़ती प्राइवेट बिक्री कर रहा है तो उस उसकी जवाबदेही होगी।