करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के कई वार्डों में अंधेरे में मोबाइल की फ्लैश लाइट से काम चलाना पड़ा। कॉलेज और अस्पताल परिसर में तीसरे दिन भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई, जबकि जनरेटर जैसी वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं की गई है। नतीजा यह रहा कि मरीज, डॉक्टर, स्टाफ और हॉस्टल में रह रहे विद्यार्थी परेशान रहे। बिजली न होने से कंप्यूटर और नेटवर्क पूरी तरह बंद रहे। रिकॉर्ड एंट्री, पर्ची बनाना, रिपोर्ट अपलोडिंग, मेडिकल स्टोर से दवा निकालना, हर प्रक्रिया थम गई।
जहां मरीजों की पर्ची भी मैनुअल बनाई गई, वहीं ओपीडी में रजिस्ट्रेशन भी घंटों बंद रहा। लैब जांच, एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसे जरूरी टेस्ट भी रुके रहे, जिससे मरीजों को बाहर इलाज कराने के लिए भटकना पड़ा। कुछ मरीज समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण इलाज शुरू नहीं करा पाए। अस्पताल की आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर, वार्ड में पंखे और एसी बंद रहे, जिससे मरीजों को गर्मी और उमस में काफी तकलीफ झेलनी पड़ी।
हॉस्टल में रहने वाले इंटर्न डॉक्टर और मेडिकल विद्यार्थी तीन दिन से बिना लाइट के रह रहे हैं। पढ़ाई, पानी की मोटर, किचन और शौचालय की सुविधाएं ठप हो गई हैं। रात के समय मोबाइल चार्ज तक न हो पाने से वे बाहरी रिश्तेदारों या दोस्तों के यहां शरण लेने को मजबूर हुए। बहुमंजिला व कई हॉस्टल वाली इमारतों वाले कॉलेज में कई वर्षों से जनरेटर की सुविधा होने का दावा किया जाता है, लेकिन वह भी तीन दिन से चालू नहीं हुआ। स्टाफ ने बताया कि बिजली न होने से पूरे सिस्टम पर असर पड़ा है, और काम हाथ से करने में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं।
वर्जन-
मेडिकल कॉलेज के निदेशक एमके गर्ग का कहना है कि रेसिडेंशियल हॉस्टल जनरेटर से कनेक्टड नहीं है और ट्रांसफार्मर खराब है, रात 10 से 11 बजे के बीच इंतजाम करने का प्रयास कर रहे हैं।
वर्जन-
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से खुद का 33 केवी का पावर ट्रांसफार्मर रखा गया है। इसमें खराबी आने के कारण यहां की बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। अब निगम की ओर से 11 केवी की लाइन से अतिरिक्त पोल व एच फोर लगाकर सप्लाई चालू वीरवार रात 10 बजे तक कर दी गई। यहां की बिजली सप्लाई सुचारू करने के लिए निगम की टीम सूचना मिलने के बाद से ही लगातार कार्य किया।
- कुलदीप सिंह, एसडीओ, बिजली निगम