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Karnal News: अपील न दलील, हमेशा जेल में रहोगे...

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देव शर्मा
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करनाल। पकड़े गए तो न अपील, न दलील और न कोई वकील मिलेगा, जिदंगीभर जेल में रहोगे, इसलिए भाग जाओ यहां से...ये बात उस समय अधिकारी कहते, जब आपातकाल के खिलाफ आंदोलन करते थे।
ये कहना है आपातकाल के दौरान जेल में रहे शहर के सेक्टर चार पार्ट-दो निवासी ओमप्रकाश अत्रेजा का। अब उनकी उम्र 88 वर्ष हो चुकी है लेकिन अभी भी वह आपातकाल को याद करके कांप जाते हैं।
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ओमप्रकाश अत्रेजा लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हैं। आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने की बात याद आते ही वह अतीत में खो गए। बोले-वह 25-26 जून की रात थी, रात्रि के 12 बजे देश में आपातकाल का एलान हो गया। संघ ने इसका खुला विरोध किया।
26 जून 1975 की सुबह 11 बजे उन्होंने अपने साथियों के साथ करनाल शहर को बंद करा दिया। वह सरकार के खिलाफ आंदोलन भी कर रहे थे तो एसएचओ कहने लगा कि भाग जाएं, नहीं तो पूरी जिंदगी जेल में सड़ जाओगे, जमानत नहीं होगी लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आंदोलन जारी रखने की बात कही लेकिन पुलिस का दवाब अधिक बढ़ गया तो वह साथियों के साथ हरिद्वार चले गए।
उनके साथ स्वर्णानंद, परमानंद खुराना, संघ चालक फकीरचंद शाह भी थे। एक सप्ताह के बाद वापस लौटे तो पता चला कि उनके घर की तलाशी ली गई, उनके परिजनों व रिश्तेदारों को परेशान किया गया। उनके साथ मारपीट की गई।
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परिजनों ने उन्हें उसी दिन दिल्ली भेज दिया। एक परिचित के यहां 10 दिन रहे। इसी दौरान उन्हें संघ ने इश्तिहार बांटने का काम सौंप दिया।
इसी बीच उनके भाई रामलाल अत्रेजा भी नहीं रहे, उनके पिता किशनलाल अत्रेजा को भी हार्टअटैक आ गया, वह भी साथ छोड़ गए। उनकी पत्नी संतोष अत्रेजा को भी पुलिस ने काफी परेशान किया।
इसके बाद उन्होंने साथियों के साथ शामिल होकर विधानसभा के सामने सत्याग्रह किया।
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