नीलोखेड़ी की ग्राम पंचायत माजरा रोड़ान के करीब नौ पंचों ने गांव में
विकास कार्यों से लेकर अनदेखी करने पर मंगलवार को डीसी बलराज सिंह को त्याग
पत्र सौंपा।
इसमें सरपंच, ग्राम सचिव व बीडीपीओ द्वारा अनदेखी करने के
गंभीर आरोप लगाए और हर वर्ष लाखों रुपये हड़पने की शिकायत की। डीसी ने
त्याग पत्र ले लिया है, पूरे मामले की जांच करने का जिम्मा एसडीएम को दिया
है। डीसी ने जल्द जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का
आश्वासन दिया।
पंच मदनलाल, जयप्रकाश, मोहनलाल, रीना देवी, नीलम देवी,
रामचंद्र, सोमपाल, मेवा सिंह ने बताया कि गांव के करीब 100 एकड़ जमीन
पंचायती है। बोली पर देते हैं, लेकिन पैसों का कोई हिसाब किताब नहीं है। इस
मामले को लेकर सोमवार को नीलोखेड़ी के बीडीपीओ को शिकायत करने गए थे,
उन्होंने सभी पंचों के साथ अभद्र व्यवहार किया और औकात में रहने की धमकी
दी।
अफसरों की इस तरह की तानाशाही से परेशान होकर गांव के 11 पंचों में से
नौ पंचों ने सामूहिक रूप से त्याग पत्र देना ही बेहतर समझा। यदि पूरे मामले
की जांच पड़ताल हो तो सरपंच से लेकर ग्राम सचिव और बीडीओ दोषी पाए जा सकते
हैं। त्याग पत्र में पंचोें ने नौ सवाल देकर भ्रष्टाचार को जगजाहिर कर रहे
हैं।
गंदगी से अटा गांव
त्याग पत्र में लिखा है कि ग्राम
पंचायत माजरा रोड़ान में पिछले दो वर्षों से सफाई कर्मचारी की मृत्यु होने
के कारण पद खाली पड़ा है। इस कारण गांव में गंदगी के ढेर लगे हैं। इस बारे
सरपंच, ग्राम सचिव, बीडीओ ने कोई सफाई कर्मचारी लगाने में रुचि नहीं दिखाई।
पिछले दो वर्षों से सरपंच ने कोई भी पंचायत की मीटिंग नहीं बुलाई। सरपंच व
ग्राम सचिव मिलकर पंचायत फंड को बिना पंचों के हस्ताक्षर के कार्रवाई करके
फर्जी काम दिखाकर हड़प कर गए हैं। इसमें बीडीपीओ भी पैसे हड़पने में बराबर
का दोषी है। सरपंच द्वारा पिछले दो वर्षों से बैंक में यह राशि जमा नहीं
करवाई और तमाम राशि फर्जी बिल बनाकर खुर्द बुर्द करके पंचायत को हानि
पहुंचाई है।
तीन माह से नहीं दिया मानदेय
पंचों, सरपंच का पिछले
एक वर्ष का मानदेय तीन महीने से पंचायत के खाते में आया हुआ है जो कि
सरपंच, ग्राम सचिव द्वारा आज तक पंचों को वितरित नहीं किया गया। पंचायत की
शामलात भूमि की नीलामी भी किसी उच्च अधिकारी की देखरेख में करवाकर तमाम
नीलामी की राशि मौके पर पंचायत के खाते में जमा करवाई जाए। उपरोक्त जांच
किसी उच्च अधिकारी से करवाई जाए। समय पर बुढ़ापा पेंशन भी नहीं दी जाती।
उपरोक्त कारणों के कारण हम सभी पंच सामूहिक अपना त्याग पत्र पेश करते हैं।