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एक और गिनीज रिकार्ड की गवाह बनेगी कर्ण नगरी

Sat, 01 Mar 2014 11:30 PM IST
करनाल
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राजा कर्ण की पावन धरती तेईस मार्च को गिनीज विश्व रिकार्ड की गवाह बनेगी। सामाजिक संस्था नेशनल इंटीग्रेटिड फोरम ऑफ एक्टिविस्ट एंड आर्टिस्ट (निफा) इस दिन सबसे बड़ी मानव मशाल बनाकर एक कीर्तिमान स्थापित करेगी।  निफा सामाजिक सरोकार के मुद्दों में विश्व स्तर पर पहचान रखती है।
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निफा ने इस बार यह विश्व रिकार्ड देश के शहीदों को समर्पित करेगी। इससे पहले स्वामी विवेकानंद को समर्पित विश्व रिकार्ड बनाया जा चुका है।

यह रिकार्ड गुजरात के बडौदरा जिला के अकोता स्टेडियम में बीआरजी चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से बनाया गया है। ट्रस्ट की ओर से यह रिकार्ड स्वामी विवेकानंद के जन्मोत्सव पर 12 जनवरी 2013 को 1538 प्रतिभागियों की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी मानव मशाल बनाई थी। वहीं, इस बार चार हजार विद्यार्थी आयोजन में हिस्सा लेंगे।  

मिल्खा सिंह आ सकते हैं कार्यक्रम में
विश्व रिकार्ड बनाने के दिन तीनों शहीदों के परिवार के लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। निफा के महाराष्ट्र अध्यक्ष सतीश जोंदले को शहीद राजगुरु के परिवार से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंजाब में शहीद भगत सिंह और सुखदेव के परिवार से निफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू संपर्क करेंगे। इस कार्यक्रम में मिल्खा सिंह को भी आमंत्रित करने की योजना है।
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ये हैं तीन रिकार्ड
निफा ने पहला विश्व रिकार्ड 13 जनवरी 2010 को करनाल में ‘बेटियों की लोहड़ी’ कार्यक्रम में लिंग समानता पर 446 प्रतिभागियों नेे दो किलोमीटर वॉक कर स्लोवाकिया में बने 336 प्रतिभागियों के रिकार्ड को तोड़ा था।

दूसरा विश्व रिकार्ड राजा कर्ण की धरती पर ही विश्व शांति एवं परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए 6057 प्रतिभागियों ने पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लेकर बनाया। वहीं, करनाल में ही एड्स जागरूकता के लिए दो अप्रैल 2012 को 6847 प्रतिभागियों के साथ रेड रिबन बना कर तीसरा विश्व रिकार्ड स्थापित किया था।

यह चौथा विश्व रिकार्ड देश के लिए बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। गिनीज बुक में छोटे से हरियाणा राज्य के करनाल शहर से चार विश्व रिकार्ड भारत के नाम पर दर्ज होना बहुत महत्वपूर्ण बात है। शहीदों को सम्मान दिलाना बेहद सराहनीय कार्य होगा।
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