करनाल। कोहरे में लोगों को सुरक्षित सफर देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर तो सफेद पट्टी लगाने का कार्य शुरू हो चुका है। लेकिन शहर के प्रमुख मार्गों से गायब हुई सफेद पट्टी लगाने के लिए अभी तक नगर निगम अधिकारियों की नींद नहीं टूटी है। निगम की ओर से न तो सफेद पट्टी लगाने का कार्य शुरू किया गया है और न ही कोई योजना बनी है।
ऐसे में रोजाना कोहरा छाने के बाद लोग खतरे भर सफर करने को मजबूर हैं। जबकि निगम के अधिकारी लोगों को सुविधाएं देने के लिए केवल कार्यालयों में बैठक करने तक ही सीमित हैं। ये स्थिति भी तब है, जब 28 अक्तूबर को हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उपायुक्त उत्तम सिंह ने सभी अधिकारियों सख्ती से सड़कों को दुरुस्त करने के आदेश दिए थे।
विदित हो कि तीन माह पहले बरसातों में सड़कों से कोहरे में जीवनरेखा मानी जाने वाली सफेद पट्टियां जलभराव में धुल गई। लेकिन प्रशासन ने अभी तक इन सड़कों पर सफेद पट्टी बनवाना जरूरी नहीं समझा। ऐसे में कोहरे छाने के बाद रात में इन काली सड़कें हादसे के बाद खून से लाल हो रही हैं। इस बावजूद जिम्मेदार आंखें मूंदे हैं।
शहर के प्रत्येक प्रमुख मार्ग पर चौराहों के चबूतरे और डिवाइडर ध्वस्त पड़े हैं। इसके अलावा डिवाइडर में लगी ग्रिल और लगे जरूरी संकेतक भी गिरे और टूटे पड़े हैं। जो इस स्थिति का प्रमाण हैं कि यहां कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। लेकिन इन सड़कों से गुजरने वाले जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
कई जगहों पर लोग हादसों के कारण लोग गंभीर रूप से चोटिल भी हो चुके हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन्हें नहीं सुधारा गया तो लोग हादसों का शिकार होंगे। विदित हो कि गतले वर्ष की तुलना में इस साल 486 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 198 लोग जान गवा चुके हैं।
शहर में इन मार्गों पर नहीं है सफेद पट्टी
पुरानी सब्जी मंडी से परशुराम चौक, सेक्टर-12 रोड अस्पताल चौक, आईटीआई चौक से एनडीआरआई चौक, लघु सचिवालय से आईटीआई चौक रोड तक, काछवा रेलवे ओवरब्रिज, कैथल राजमार्ग नहर पुल, कैथल रोड पुल से नहर पुल तक, रेलवे रोड, रामगढ़िया मार्ग, करनाल से काछवा गांव तक, सेक्टर-9 मार्ग पर।