करनाल। पिछले दिनों पोर्टल हैक कर फर्जी आईडी जारी करने के मामले में सामने आई 1303 संपत्ति कर आईडी को नगर निगम ने खारिज कर दिया है। वहीं याशी कंपनी द्वारा ड्रोन विधि से किए गए सर्वे के कारण तैयार की गई 1.62 लाख आईडी को फिलहाल अगले साल के लिए टाल दिया है, क्योंकि नई आईडी में काफी हद तक मिलान सही नहीं हो रहे हैं। किसी में नाम गलत तो किसी में क्षेत्रफल ठीक नहीं है। इसलिए अब नगर निगम क्षेत्र में पुरानी संपत्तिकर आईडी पर ही संपत्ति कर को जमा करना शुरू कर दिया है। पुरानी प्रॉपर्टी आईडी 1.41 लाख हैं।
पोर्टल हैक करने पर दर्ज हुई थी एफआईआर
नगर निगम की ओर से 14 फरवरी-2021 को थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसमें कहा गया था कि एनडीसी पोर्टल में किसी ने अपना फोन नंबर फीड करके फर्जी आईडी जारी कर दी थी। नगर निगम ने ऐसी 252 आईडी तहसील प्रशासन को दी थी। तहसील प्रशासन ने जांच की तो इसमें से 1303 संपत्ति कर आईडी को फर्जी पाया गया था। शेष आईडी ठीक थी लेकिन इनमें कोई न कोई गड़बड़ी थी। फर्जी आईडी में कई आईडी ऐसी भी थी जो अनअप्रूब्ड क्षेत्र में जारी कर दी गई थी। यही कारण था कि डीटीपी आदि अनाधिकृत क्षेत्र में बने मकानों व अवैध कॉलोनियों को तोड़ने जाते थे तो वहां लोग रजिस्ट्री के अभिलेख और संपत्तिकर आईडी दिखाते थे। संपत्तिकर अधिकारी गगनदीप सिंह ने बताया कि तहसील की जांच के बाद सभी 1303 फर्जी आईडी को खारिज करते हुए पोर्टल से भी हटा दिया है। एनडीसी पोर्टल को अपडेट कर दिया है। अब ये सभी लोगों के बने मकान अवैध क्षेत्र में माने जाएंगे, जिनकी आईडी फर्जी थी, जिसे हटा किया गया है। जिससे ऐसे भवन स्वामियों में खलबली मच गई है।
ड्रोन से किया था सर्वे
भले ही शहर की आबादी लगातार बढ़ रही हो, रोज नए भवनों का निर्माण हो रहा हो लेकिन लंबे समय से करनाल शहर में 141295 संपत्तिकर आईडी हैं। सरकार ने याशी कंपनी के माध्यम से शहरी संपत्तियों का सर्वे कराया था। कंपनी ने ड्रोन सर्वे किया था। जिसके आधार पर कंपनी ने शहर में 162222 संपत्ति कर आईडी को सूचीबद्ध किया था। जो पहले से 20927 अधिक हैं लेकिन जब इस सूची को अपलोड किया गया तो शहर में खलबली मच गई, क्योंकि ड्रोन सर्वे में कई गड़बड़ियां सामने आई। करीब 50 से 60 फीसदी आईडी में गड़बड़ियां आई तो याशी कंपनी व नगर निगम ने निगम कार्यालय पर शिविर लगाए और नई संपत्ति कर आईडी को दुरुस्त करने का कार्य शुरू किया। शिविर में जो शिकायतें आती थी, उन्हें दुरुस्त करने के लिए कई कर्मचारियों को भी लगाया गया था लेकिन फिर गड़बड़ियों को पूर्णत: दूर नहीं किया जा सका।
दिसंबर तक लगी रोक
संपत्ति कर अधिकारी गगनदीप सिंह ने बताया कि याशी कंपनी द्वारा किए गए सर्वे की नई आईडी पर आपत्तियां व दावे लेने के लिए 17 फरवरी से 30 अप्रैल तक पीएमएस पोर्टल हरियाणा को खोला गया था। जिसमें कुल 6600 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। अब नई आईडी से पुरानी आईडी का मिलान करके उसे दुरुस्त करने का कार्य किया जा रहा है। इसलिए फिलहाल याशी कंपनी के सर्वे वाली सभी नई आईडी को दिसंबर 2021 तक के लिए रोक दिया गया है। इसलिए पुरानी संपत्तिकर आईडी को भी मान्यता देते हुए उन्हीं पर संपत्ति कर जमा कराया जा रहा है। शहर के लोग अभी पुरानी संपत्ति आईडी पर ही कर का भुगतान कर सकते हैं।