पानीपत। तीन साल पहले जो स्वयं मजदूरी करके अपना काम मुश्किल से चल रही थीं, आज ब्राह्मण माजरा गांव की नीलम ने गांव की महिलाओं को भी रोजगार दिया है। नीलम तीन साल पहले हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद नीलम का जीवन बदल गया है क्योंकि समूह से जुड़कर जहां नीलम के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है वहीं नीलम की गांव में स्वयं की पहचान भी बनी है जो अब दूसरी महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा का काम कर रही है।
नीलम ने बताया कि वह और उसका पति गांव में ही मजदूरी करके अपनी आजीविका का मुश्किल से निर्वाह कर रहे थे। कभी मजदूरी का काम मिलता तो कभी नहीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने स्वयं का काम शुरू किया जिसमें वह हरियाणवी संस्कृति का प्रतीक दामण-चुन्नरी, कुर्ता के साथ आर्टिफिशल आभूषण भी बेचती है। पहले उसने अपने घर पर ही काम शुरू किया। पहले बार जब वह स्टॉल लगाने के लिए बाहर गई तो गांव की महिलाओं के मन में भी समूह से जुड़ने की इच्छा आई। मेले से वापिस आने के बाद गांव की महिलाओं ने उससे संपर्क किया और समूह की प्रत्येक गतिविधि के बारे में जाना। तब से उसके साथ गांव की 10 महिलाएं और समूह में जुड़ चुकी है जो दामण, चुन्नरी, कुर्ता सिलने में उसकी मदद करती हैं और कुल आय में से प्रत्येक को उसकी मेहनतानुसार मेहनताना मिलता है। तीन साल में वह पांच जगह स्टॉल लगा चुकी है।
दो बार दिल्ली, एक अंबाला और एक मोहाली में स्टॉल लगाकर अच्छी आय कमा चुकी है। अब फरीदाबाद में सूरजकूंड में दिवाली मेले में उसका छठा स्टाॅल है। स्टॉल में प्रत्येक साइज के दामण-चुन्नरी, कुर्ता को स्थान दिया है जो दामण दो हजार से शुरू होकर छह हजार रुपये तक और घोटा चुन्नरी 500 से शुरू होकर एक हजार रुपये तक स्टाॅल में बेच रही है जिसे महिलाएं पसंद भी कर रही हैं।