राष्ट्रीय डेयरी मेेले में अनेक भैंसों ने रैंप पर मॉडलिंग का जलवा दिखाया। इस मेले में इस्लामपुर की भैंस ‘श्रीदेवी’ को बफलो क्वीन का अवार्ड प्राप्त किया। दूसरा स्थान बुड़शाम गांव के रहने वाले राम ेसिंह की भैंस को मिला। तीसरे स्थान डिडवाड़ी गांव के नरेंद्र की भैंस ‘खजानो’ ने हासिल किया। गुड़गांव के इस्लामपुर के रहने वाले रणधीर सिंह की भैंस ने बफेलो क्वीन का अवार्ड हासिल किया।
रणधीर सिंह ने बताया कि इस भैंस की उम्र पांच साल है और दो कटड़ों को जन्म दे चुकी है। कटड़े के जन्म के छह महीने बाद भी यह 18 किलो दूध देती है। उन्होंने बताया कि साल 2013 के एनडीआरआई मेले में उसे दूसरे स्थान मिला था। उन्होंने बताया पंजाब के माजा गांव के रहने वाले मनजीत सिंह सरदार ने इस भैंस के लिए पांच लाख रुपये की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इसे बेचने के लिए नहीं रखा है, बल्कि नाम कमाने के लिए रखा है।
सप्ताह में दो किलो घी खाती है
रणधीर सिंह ने बताया कि प्रतिदिन इसे दस किलो दाना दिया जाता है। बिनौला तथा खंडा का विशेष रूप से ख्याल रखा जाता है। गर्मी में तीन बार तथा सर्दी में केवल एक बार ही नहलाया जाता है। सरसों के तेल के साथ दिन में एक बार मालिश की जाती है। दूसरी तरफ होशियारपुर के रहने वाले राम सिंह की मुर्राह नस्ल की भैंस ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। राम सिंह ने बताया कि इसकी उम्र मात्र चार साल है।
दो बच्चों को जन्म दे चुकी है। उन्होंने कि इस समय चार महीने का बच्चा हो चुका है और अभी भी 20 किलो दूध देती है। रामसिंह ने इस भैंस की कीमत साढे़ तीन लाख रुपये मांगी है। इसे विशेष प्रकार की डाइट दी जाती है। छह किलो फीड, हरा चारा, मिक्चर तथा दो किलो बिनौला इसे हर रोज दिया जाता है।
वहीं, तीसरा स्थान डिडवाड़ी के नरेंद्र की भैंस ‘खजानो’ को दिया गया। जिसकी उम्र साढे़ तीन साल है। ‘खजानो’ इस इस समय 26 किलो दूध देती है। उन्होंने बताया कि गनौर में सब्जी मंडी के उद्घाटन पर ‘खजानो’ को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया थाई। उस समय गोलू झोटा तथा ‘खजानो’ आकर्षण के केंद्र रहे थे।