करनाल। नगर निगम वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में तय किए गए 25 करोड़ रुपये के संपत्ति कर वसूली लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहा है। अब तक करीब 11.73 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं। नगर निगम का एमसी फंड कम रिकवर होने की वजह से इसका प्रभाव शहर के विकास कार्याें पर पड़ सकता है।
शहर के विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखने के लिए निगम को संपत्ति कर से मिलने वाली आय बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस बार अपेक्षित कर वसूली न होने से सड़क निर्माण, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट्स और अन्य बुनियादी सुविधाओं की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। कम कर वसूली का सबसे बड़ा कारण संपत्तियों पर लगाया गया गलत कर निर्धारण बताया जा रहा है।
कई संपत्ति मालिकों को वास्तविक से अधिक कर नोटिस भेजे गए, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा और वे कर जमा करने से बचते रहे। कई मामलों में संपत्तियों का वर्गीकरण गलत होने के कारण विवाद की स्थिति भी बनी रही। नगर निगम द्वारा संपत्ति कर वसूली के लिए चलाए गए अभियान में भी कई खामियां रही। पहले के मुकाबले इस बार नोटिसों की संख्या कम रही, वहीं बकायेदारों पर सख्ती से कार्रवाई भी नहीं की गई।
अब नगर निगम ने बकाया संपत्ति कर की वसूली के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। जिन संपत्तियों पर कर बकाया है, उनके मालिकों को अंतिम नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, टैक्स स्लैब में सुधार कर गलत बिलिंग की समस्याओं को भी दूर किया जाएगा। नगर निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने बताया कि नगर निगम कार्यालय में वित्त वर्ष 2024-25 में 11.73 करोड़ संपत्ति कर के रूप में जमा हुए हैं। वित्त वर्ष के अंतिम तीन दिनों में करीब 73 लाख रुपये संपत्ति कर जमा हुआ।
जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने 78 लाख, शुगर मिल कार्यालय ने 61 लाख, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने 31 लाख, मच्छली पालन विभाग ने 22 लाख, उपायुक्त कार्यालय ने साढे 11 लाख, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 11 लाख, हरियाणा रोजवेज तीन लाख, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने तीन लाख और हैफेड कार्यालय ने नगर निगम कार्यालय में अपना संपत्ति कर जमा करवाया है। उन्होंने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा है कि वे समय पर संपत्ति कर जमा करवाएं।