संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। श्री राम सेवा मंडल की ओर महावीर मंदिर में चल रही श्री राम कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य प्रहलाद मिश्रा रामायणी ने कहा कि भागीरथी गंगा पतित पावनी और कल्याण दायिनी देव नदी है। गांव जनमानस को पावन और विशुद्ध करती है, ऐसे ही श्री राम कथा रूपी गंगा घर-घर और जन-जन को परम पवित्र और मानवता का बोध कराती है।
उन्होंने कहा कि मानसरोवर में शरीर की मेल धुलती है और मानस सरोवर में अवगाहन करने से मन से पाप करने की प्रवृत्ति समाप्त हो जाती है। शुक्रवार को धनुष भंग की कथा सुनाते हुए श्री रामायणी जी ने बताया धनुष अहंकार का प्रतीक है जब तक गुरुदेव की कृपा नहीं होती तब तक अहंकार मिटता नहीं है।
प्रभु श्री राम ने धनुष तोड़ने से पहले दो बार गुरुदेव भगवान के चरणों में प्रणाम किया। धनुष में ऋषि दधीचि की आत्मा है और श्री राम जी परमात्मा है दोनों का मिलन जभी होगा।
जब बीच में कोई होगा महात्मा। इससे श्री राम जी धनुष को आसानी से तोड़ा अहंकार के मिटने से ही अखंड ज्ञानधन प्रभु श्री राम और भक्ती रुपी सीता जी का पावन परिणय (विवाह) संपन्न हुआ। चारों भाइयों का पावन विवाह जब श्री जनकपुर में संपन्न हुआ तो महाराज दशरथ अत्यंत प्रसन्न है।
मानो उन्हें चारों फल प्राप्त हो गए हैं। और अत्यंत तीव्र अभिलाषा हुई कि जो राम जानकी वर आसान पर इतने अच्छे सुंदर लग रहे हैं। वह जब राज सिंहासन पर विराजे जाएंगे तब कितने दिव्य सुंदर लगेंगे।