पिछले दिनों सीएम मनोहर लाल के साथ गलबहियां और भरत मिलाप करने के बाद एक फिर करनाल के सांसद अश्वनी चोपड़ा सीएम के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। हालांकि, सरकार की ओर से जारी विज्ञापन और निमंत्रण पत्रों में भी सांसद का नाम लिखा हुआ है। वहीं, स्टेज पर भी सांसद के लिए कुर्सी की व्यवस्था की गई थी।
शुक्रवार को आयोजित जिला परिषद व ब्लाक समिति सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में सांसद चोपड़ा के नहीं पहुंचने से फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। बता दें कि इससे पहले भी कई बार सांसद ऐसा कर चुके हैं। वर्र्ष 2015 में पानीपत में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से उन्होंने दूरी बना ली थी। इसके अलावा, अन्य रैलियों में भी कई बार वे बगावती तेवर दिखा चुके हैं। सांसद को कभी निमंत्रण पत्र नहीं मिलने को लेकर नाराजगी रहती है तो कभी उचित स्थान पर सीट नहीं मिलने की।
हालांकि, पिछले दिनों सांसद ने खुद सीएम को अपने घर पर दोपहर भोज कराया था और दोनों ने गले मिलकर शिकवे भी दूर किए थे। सांसद चोपड़ा ने मनोहर लाल को अपना भाई बताते हुए कहा था कि आगे से वे उनके साथ खड़े मिलेंगे और मिलकर करनाल का विकास कराएंगे। शुक्रवार को सांसद के नहीं आने के कारण राजनीतिक गलियारों में फिर से चर्चाओं ने जन्म ले लिया।
उधर, इस बारे में जब सांसद के प्रतिनिधि वीरेंद्र गौतम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आज सांसद दिल्ली में अपने निजी कार्यों से व्यस्त थे, इसलिए कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर सके। सीएम से बहुत अच्छे संबंध हैं। किसी से भी किसी तरह की कोई नाराजगी नहीं है।