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सांसद भाटिया बोले, मैं झूठ नहीं बोलता... जिंदगी में मैंने कभी हेलमेट नहीं खरीद

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हर सिर हेलमेट अभियान का आगाज करने के लिए हुए कार्यक्रम में सीएम के सामने सांसद संजय भाटिया ने कहा कि मैं कभी झूठ नहीं बोलता। मेरी बात सुनकर युवा भी हंसेंगे। मैंने जिंदगी में कभी हेलमेट नहीं खरीदा, मतलब कि मैंने गलती की है कि ट्रैफिक रूल्स को फॉलो नहीं किया। जब थोड़ी सख्ती हुई तो मैं दुपहिया वाहन छोड़ कार चलाने लगा। यही नहीं जब मेरा लाइसेंस बना था तो मुझे गाड़ी चलानी भी नहीं आती थी। उन्होंने कहा कि आज के इस कार्यक्रम को मैं अपने उन गलतियों के प्रायश्चित के रूप में ले रहा हूं। शनिवार को डॉ. मंगलसेन ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम के दौरान सांसद ने कहा कि अब इस अभियान से युवाओं को जोड़कर उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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सांसद बोले- मैं तो फेल होकर वापस गया था...
मंच पर अपने भाषण के दौरान सांसद बोले कि सीएम साहब मैं ईमानदारी से एक बात स्वीकार करुंगा, झूठ नहीं बोलूंगा। जब मैं दो दिन पहले पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज में गया तो वहां के प्रिंसिपल बोले- संजय भाटिया ब्रिलिंयट स्टूडेंट रहे हैं हमारे कॉलेज के। जब मेरी बारी आई तो मैंने मंच से बच्चों से कहा कि झूठ तो बोलूंगा नहीं। ब्रिलियंट स्टूडेंट तो मैं था नहीं। इस कॉलेज में मैं फेल होकर वापस स्कूल में चला गया था। मैंने ईमानदारी रखी। वही बात मैं आज बच्चों के सामने कहता हूं। आप नाराज मत हो जाना कि हम सांसद को फालो करते हैं और ये क्या कह रहे हैं।
अभियान का आइडिया किसी और ने दिया, चलाएगा कोई और
सांसद बोले-इस अभियान में मेरा कोई योगदान नहीं है। आइडिया देने वाले भी कोई और थे, चलाने वाले भी कोई और हैं और आगे भी कोई और ही चलाएगा। मेरे फिजिकल ट्रेनर दलीप शर्मा व नितिन नारंग की अभियान के प्रति सोच है। मैंने तो इस सोच को आगे बढ़ाया और हेलमेट कंपनी के एमडी सिद्धार्थ खुराना से बात रखी थी, जिस पर उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक ना केवल सहमति दी बल्कि कम्पनी की ओर से निशुल्क हेलमेट उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब मैं नया सांसद बना था तो सीएम ने एक बार मुझे कहा था कि जब कोई नेता बन जाता है तो उसके परिवार व रिश्तेदारों के कारण कई गड़बड़ियां हो जाती हैं, इसलिए मेरे चुनाव में बेटा चांद फील्ड में जाता था। सीएम की बात याद थी इसलिए मैंने उसे दिल्ली नौकरी के लिए भेज दिया। वहां भी उसके पास लोगों के फोन आने लगे। बेटा राजनीति में पड़कर डीसी-एसपी को फोन ना करे, इसलिए उसे अपनी उम्र के युवाओं के लिए अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी है।
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