कोरोना महामारी न जाने कितने लोगों की जिंदगी लील चुकी है। मंगलवार को करनाल में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां के बलड़ी श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमित मां की चिता जल रही थी कि तभी बेटे के पास उसके घर दिल्ली से फोन आया कि कोरोना पीड़ित उसकी पत्नी की भी मौत हो गई है। मां के बाद पत्नी की मौत का समाचार सुनकर भूपेश श्मशान घाट में ही बेसुध होकर गिर पड़ा। ड्यूटी पर तैनात नगर निगम कर्मचारियों ने उसे संभाला। बेबसी ऐसी कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी उसे दिल्ली जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। जब शहर की मेयर रेणू बाला गुप्ता को इस घटना का पता चला तो उन्होंने तुरंत उसकी मदद की और वाहन का इंतजाम कर उसे दिल्ली भेजा।
मां को मुखाग्निी देते ही मोबाइल पर मिली पत्नी के जाने की सूचना।
दिल्ली निवासी भूपेश की कोरोना पॉजिटिव मां करनाल के प्राइवेट अस्पताल में उपचाराधीन थी। तीन दिन पहले ही उसे यहां के अस्पताल में भर्ती किया था। मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई। कोविड-19 गाइडलाइन के अनुसार उसका बलडी बाइपास स्थित श्मशान घाट पर दाह संस्कार किया गया। मां को मुखाग्निी देने के लिए भूपेश ने पीपीई किट पहनी और अपना मोबाइल नगर निगम कर्मी को दे दिया। इसी दौरान भूपेश के घर से फोन आ गया। नगर निगम कर्मी ने कॉल सुनी तो उन्होंने कहा बहुत इमरजेंसी है जल्दी भूपेश को फोन दो। जब भुपेश ने मां को मुखाग्निी दी तो कर्मी ने उसे फोन दे दिया। फोन सुनते ही भूपेश बेहोश होकर गिर गया। नगर निगम कर्मचारियों ने पूछा तो बताया कि उसकी पत्नी की भी मौत हो गई है। इसके बाद मेयर ने उसे अपनी गाड़ी से दिल्ली पहुंचाया।
दिल्ली में अस्पताल के बाहर हुई पत्नी की मौत,
भूपेश ने बताया कि घर में उसकी पत्नी और मां कोरोना पॉजिटिव आए थे। मां को वह करनाल के प्राइवेट अस्पताल में लेकर आ गया था। पत्नी घर पर ही थी। तबीयत बिगड़ने पर उसके परिजन पत्नी को अशोक बिहार के एक अस्पताल में ले गए तो वहां उसे दाखिल करने से मना कर दिया, कहा कि ऑक्सीजन नहीं है। ऐसे में अस्पताल के गेट पर ही उसकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। अपनों की जान बचाने के खातिर मैं अकेला भागदौड़ करता रहा।
संक्रमितों को नहीं मिल रहे बेड व ऑक्सीजन
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, यूपी से बड़ी संख्या में संक्रमितों को हरियाणा के अस्पतालों में लाया जा रहा है। इसकी वजह दिल्ली में अस्पतालों में चिकित्सा इंतजामों की कमी बताई जा रही है। बेड और ऑक्सीजन नहीं मिल रही। करनाल के अस्पतालों में भी बाहर के लोग दम तोड़ रहे हैं। बिलखते हुए भूपेश ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी के कारण ही उसकी पत्नी की अस्पताल के बाहर जान चली गई। उसे अस्पताल में दाखिल होने का मौका भी नहीं दिया गया।