करनाल। जिले में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियों के बीच मतदाता सूची के परीक्षण का कार्य तेज हो गया है। लोकल शिक्षकों को तो ड्यूटी पर लगाया ही जा रहा है। कमी के चलते प्रशासन ने अब आंगनबाड़ी वर्कर्स को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की जिम्मेदारी सौंप दी है। जिले के करीब 100 से अधिक आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स को इस कार्य में लगाया गया है।
इसका सीधा असर आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन पर पड़ा है। आंगनबाड़ी वर्कर यूनियन का कहना है कि केंद्र की मनाही के बावजूद भी ड्यूटी दी जा रही है। हर ब्लॉक से 10-15 आंगनबाड़ी वर्कर की बीएलओ के लिए ड्यूटी लगाई गई है। जिले में करीब 1400 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें पहले से ही करीब 20 प्रतिशत वर्कर्स की कमी है। अब 100 से अधिक केंद्र ऐसे हो गए हैं, जहां वर्कर्स की गैरमौजूदगी में संचालन केवल हेल्पर्स के भरोसे किया जा रहा है। इससे बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं।
- घर-घर पहुंचकर कर रहीं सत्यापन
ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी वर्कर्स की पहले से ही हर घर तक पहुंच है। महिलाओं और बच्चों से जुड़े कार्यों के कारण लोग उन पर भरोसा करते हैं। यही वजह है कि अब बीएलओ के रूप में नियुक्त वर्कर्स अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे सही और सटीक जानकारी जुटाने में मदद मिल रही है।
आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की प्रदेश महासचिव रूपा ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर्स नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें बीएलओ का अतिरिक्त कार्य सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्कर्स पहले से ही पोषण अभियान, टीकाकरण, सर्वे और अन्य योजनाओं में व्यस्त रहती हैं। ऐसे में यह अतिरिक्त जिम्मेदारी उनके लिए बोझ बन गई है।