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Karnal News: एमएचयू को मिलेगा अत्याधुनिक छह मंजिला भवन

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- महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के भवन का निर्माण कार्य 65 एकड़ में 358 करोड़ की लागत से होगा शुरू
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। स्वीकृति के करीब आठ साल बाद अब हरियाणा का पहला महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के भवन का निर्माण अगले माह शुरू हो जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कार्यसमिति ने 358 करोड़ रुपये के टेंडर को स्वीकृति दे दी है। विश्वविद्यालय की छह मंजिला इमारत को तक्षशिला विश्वविद्यालय का भवन बनाने वाली कंपनी मिकोन लिमिटेड तैयार करेगी। इसके लिए 65 एकड़ भूमि पहले से ही अधिगृहीत कर ली गई थी।
महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू) करनाल के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कार्य समिति ने 24 जून को हरियाणा के पहले बागवानी विश्वविद्यालय करनाल के मुख्य भवन व परिसर के निर्माण के टेंडर पर स्वीकृति दी है। इसका निर्माण कार्य दो पैकेज में एक साथ 65 एकड़ जमीन पर किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में शुरू हो सकता है। शिलान्यास मुख्यमंत्री की ओर से किया जा सकता है। निर्माण में करीब दो साल का समय लग सकता है। पहले पैकेज में करीब 177 करोड़ रुपए व्यय होंगे जिसमें मुख्य प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, पुस्तकालय व अन्य निर्माण होगा। दूसरे पैकेज में करीब 181 करोड़ रुपए से कुलपति निवास, कर्मचारी निवास, अंतरराष्ट्रीय छात्रावास, लड़के ओर लड़कियों के लिए छात्रावास, किसान प्रशिक्षण छात्रावास महिला व पुरुषों के लिए, बहुउद्देशीय हॉल, व्यायामशाला, एम्फीथिएटर, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, चिकित्सा देखभाल केंद्र, सीवरेज ट्रीटमेंट सिस्टम, सड़कें, बैंक ओर एटीएम, डाकघर आदि का निर्माण किया जाएगा।
मुख्य परिसर में नौ विभाग यानी फल, सब्जी, फूल व मसाले, औषधीय फसल, कटाई उपरांत प्रबंधन, मधुमक्खी पालन, फसल सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन विभाग बनेंगे। फिलहाल सरकार ने 358 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है लेकिन जीएसटी आदि मिलाकर लागत करीब 400 करोड़ के आसपास होगी।
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कई साल से किराए के भवन में चल रहा विश्वविद्यालय
करनाल में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय की घोषणा हरियाणा सरकार ने किसान हित में वर्ष 2016 में की थी। इसके बाद इसकी स्थापना की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए भूमि को अधिगृहीत करने में भी समय लगा। फिलहाल घोषणा के करीब दो साल बाद उंचानी में बागवानी प्रशिक्षण केंद्र (एचटीआई) के भवन में किराए पर विश्वविद्यालय को शुरू कर दिया गया। इस विश्वविद्यालय के छह क्षेत्रीय केंद्र भी विभिन्न स्थानों पर संचालित हैं। जिसमें एक खरकड़ी क्षेत्रीय केंद्र में अनुसंधान कार्यों के लिए भी मुख्यमंत्री ने 24 जून को ही 9.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। अब लंबे समय बाद विश्वविद्यालय को अपना आधुनिक और भव्य भवन मिलने की संभावना है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय भवन का टेंडर मिकोन लिमिटेड कंपनी को मिला है। इसी कंपनी ने करीब 1800 करोड़ की लागत वाले तक्षशिला विश्वविद्यालय के भवन जैसे देश में कई बड़े भवन बनाए हैं।
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विश्वविद्यालय बागवानी फसलों पर अनुसंधान करेगा, नई किस्मों का विकास करेगा। फसल सुरक्षा, पोषण प्रबंधन, फसल प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धित उत्पाद भी बनाएगा। जिससे उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र में बागवानों का विकास होगा। अनुसंधान कार्य से नवीनतम तकनीक निकलकर आएगी। जिसका सीधा फायदा किसानों को होगा। किसान तेजी से परंपरागत खेती को छोड़कर बागवानी फसलों की तरफ बढ़ेंगे। शिक्षण कार्य का फायदा विद्यार्थियों को होगा, मानव संसाधन बढ़ेंगे। उन्नत किस्मों का बीज एवं पौध सामग्री भी किसानों को उपलब्ध होगी।
- डॉ. सुरेश मल्होत्रा, कुलपति महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल
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