- नसों और दिल की बीमारी के मरीजों का हो सकेगा इलाज
- अब तक सिविल अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में नहीं दोनों विशेषज्ञ, पीजीआई या जाना पड़ता है निजी अस्पताल
- प्रबंधन ने दोनों का मांगपत्र बनाकर मुख्यमंत्री व डीएमईआर को भेजा
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन व कार्डियोलॉजिस्ट की काफी समय से रिक्त पड़े पद भरने की उम्मीद जगी है। मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने मुख्यमंत्री नायब सिंह के आदेशानुसार बैठक कर मरीजों की सुविधा के लिए एक न्यूरो सर्जन व कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर सहित कैथ लैब की आवश्यकता का एक मांगपत्र बनाकर मुख्यमंत्री व डीएमईआर को भेज दिया है। ऐसे में दोनों डॉक्टर आने के बाद जिलावासियों को इलाज के लिए पीजीआई व निजी अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा।
दो दिन पूर्व लघु सचिवालय के सभागार में मुख्यमंत्री नायब सिंह ने जिलेभर के प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की समस्याओं व चिकित्सकों की कमी को आगामी सात दिनों में दूर करने के बात कही थी और निदेशक को जल्द सूची बनाकर उन्हें सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री के आदेशानुसार मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने मंगलवार को सभी विभागाध्यक्षों की बैठक ली और मेडिकल कॉलेज की समस्याओं व डॉक्टरों की रिक्त पदों की सूची तैयार की। इस रिक्त पदों की सूची में सबसे पहले न्यूरो सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट सहित कैथ लैब की मांग रखी गई है।
नस व दिल की बीमारों का हो सकेगा इलाज
निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार सूची तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय सहित डीएमईआर को भेज दी गई है। दोनों विशेषज्ञों के आने के बाद नस व दिल की बीमारी वाले लोगों का करनाल में ही इलाज संभव हो सकेगा। वहीं कैथ लैब से सरकारी शुल्क पर दिल के दौरे वाले मरीजों को स्टंट की सुविधा भी मिल सकेगी। अभी फिलहाल यह सुविधा न तो नागरिक अस्पताल में उपलब्ध है और न ही कल्पना चावला मेडिकल में। जिससे लोगों को पीजीआई व निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
मुख्यमंत्री के आदेशानुसार मेडिकल कॉलेज के सभी विभागाध्यक्षों की बैठक कर ली गई है। वहीं मेडिकल कॉलेज के लिए अन्य डॉक्टरों के साथ-साथ विशेष रूप से न्यूरो सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट व कैथ लैब की आवश्यकता मांगपत्र में डाली गई है। दोनों डॉक्टरों व कैथ लैब आने से सीधे तौर पर जिले के लोगों को लाभ मिलेगा। उन्हें पीजीआई व निजी अस्पतालों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।
डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, केसीजीएमसी, करनाल