नियमानुसार हर महीने होने वाली नगर निगम हाउस की बैठक लगातार बन रहे दबाव
के चलते आखिरकार तीन माह बाद फिर से बुलाई गई है। अहम बात यह है कि बैठक
में अगस्त माह में हुई बैठक में पास हुए प्रस्तावों व विकास कार्यों की
समीक्षा होगी, साथ ही स्मार्ट सिटी फेज 2 के प्रस्ताव को भी पास कराया
जाएगा।
उधर, बैठक की तिथि तय होने के बाद भी कई पार्षदों ने सूचना और
एजेंडा नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं। ऐसे में निगम की सियासत फिर से चरम
है। आशंका जताई जा रही है कि बैठक में हंगामे के आसार हैं और कई पार्षद
पहले से इसकी तैयारी किए बैठे हैं। पार्षद निगम अधिकारियों को रुके हुए काम
और समय पर बैठक की सूचना और एजेंडा नहीं मिलने के कारण खुलकर अपना गुबार
निकालने की तैयारी में हैं।
नगर निगम के हाउस की बैठक शनिवार को होनी
तय है। जो शहर की जनता व निगम पार्षदों के लिए अहम है। बैठक का एजेंडा
तैयार है, पहला स्मार्ट सिटी फेज 2 के लिए प्रस्ताव और दूसरे पिछली मीटिंग
में पास हुए विकास कार्यों की समीक्षा, तीसरा सीएम की घोषणाओं पर प्रस्ताव
पास कराना है। निगम प्रशासन बैठक के लिए तैयारी कर चुका है और इसके लिए
पार्षदों के लिए सूचना भेज दी गई है।
हालांकि, कई पार्षद ऐसे भी हैं जो
निगम प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें न तो इस बार बैठक की सूचना
मिली, और न ही इससे पहले सूचना दी जाती है। पार्षदों का आरोप है कि बैठक
में केवल खानापूर्ति की जाती है। अधिकारी ही सारे एजेंडे बनाते हैं और
अधिकारी ही प्रस्ताव रखते हैं, पार्षदों को यहां कोई तवव्जो नहीं दी जा रही
है। पार्षद राकेश कुमार, पार्षद बलविंद्र सिंह का आरोप है कि उन्हें
प्रोपर तरीके से बैठक की सूचना नहीं दी जाती है। बैठक में केवल खानापूर्ति
की जाती है। असल बात यह है कि यहां पर पार्षदों को कोई मान सम्मान नहीं मिल
रहा है। ऐसे में पार्षदों को बगावती सुर बैठक में हंगामा कर सकते हैं।
निगम के ईओ धीरज कुमार का कहना है कि सभी पार्षदों को बैठक की सूचना दे दी
गई है और सभी के पास एजेंडे भी भेजे गए हैं।
पिछली बैठक में प्रस्ताव पास, काम शुरू नहीं
हाउस
की पिछली बैठकों में पास हुए प्रपोजल भी अब तक फाइलों से बाहर नहीं आए
हैं। शहर में चल रहे विकास कार्यों की धीमी गति व निगम प्रशासन की लापरवाही
से पार्षदों में भी रोष है। स्मार्ट सिटी व शहर के विकास के मुद्दों पर
होने जा रही हाउस की बैठक शहर की जनता को खासी उम्मीद है। पिछली बैठकों में
पास हुए मुद्दे व शहर में अधूरे पड़े विकास कार्य बहस का मुद्दा हो सकते
हैं। वहीं कुछ पार्षद निगम पर उनके साथ सौतेला व्यवहार करने का भी आरोप लगे
हैं। अरसे विकास कार्यों की बाट जोह रही अवैध कॉलोनियों को भी इस बार
विकास की दौड़ में शामिल होने की उम्मीद है।
हाउस की बैठक में इन मुद्दों पर हो सकती है बहस
निगम
प्रशासन ने स्मार्ट सिटी पर निगम पार्षदों से उनके सुझाव लेने व उनके
वार्ड चल रहे विकास कार्यों को स्मार्ट तरीके से करवाने के लिए बैठक बुलाई
है। मुख्य उद्देश्य करनाल को पहले 20 स्मार्ट शहरों में शामिल करने को लेकर
है। लेकिन पार्षदों के बीच अब तक हुए विकास कार्यों की समीक्षा व अधूरे
पड़े विकास कार्यों को लेकर बहस हो सकती है। अब तक हुई निगम की बैठकों में
140 करोड़ के प्रपोजलों को स्वीकृति मिली है। लेकिन अभी तक शहर में केवल
40 करोड़ के प्रपोजल पर काम शुरू हुआ है। शहर में शुरू होने जा रही कार
फ्री डे की मुहिम, अंबेडकर चौक से अग्रसेन चौक तक निर्मित होने वाली
स्मार्ट सड़क व 12 सेक्टर में स्वीकृत नगर निगम कार्यालय के भवन अहम है।
हर के विकास के मुद्दों पर क्या कहते हैं पार्षद
शहर
धीमी गति से विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे शहर की जनता को भी परेशानी हो
रही है। हाउस की बैठकों में पास हुए प्रपोजल तो अभी तक फाइलों से बाहर नहीं
आए हैं। इससे पार्षदों को अपने वार्ड की जनता को जवाब देना मुश्किल हो गया
है। मेरे पास बैठक की कोई सूचना नहीं है।
बलविंद्र सिंह, वार्ड पार्षद-2
शहर
के विकास के मुद्दों की समीक्षा के लिए हर माह हाउस की बैठक होनी चाहिए।
लेकिन यहां तो छह माह बाद बैठक होती है और ज्यादातर पार्षदों के पास उसकी
सूचना तक भी नहीं होती। निगम प्रशासन की लापरवाही से शहर के विकास कार्यों
को गति नहीं मिल रही है। बैठक की सूचना नहीं दी जाती है।
राकेश कुमार वार्ड पार्षद-1
शहर
में विकास कार्यों ने अब रफ्तार पकड़ी है, लेकिन उसकी पैरवी करने के लिए
पार्षदों का आगे आना जरूरी है। वे 14 नवंबर को होने वाले हाउस की बैठक में
अपने वार्ड की कॉलोनियों में समस्या रखेंगे तथा अधूरे पड़े विकास कार्यों
को जल्द पूरा करवाने की मांग करेंगे।
विनोद टीटोरिया वार्ड पार्षद-14
नगर
निगम हाउस की बैठक हर माह होनी चाहिए। ताकि शहर में हो रहे विकास कार्यों
की समीक्षा हो सके। लेकिन निगम प्रशासन की लापरवाही से कई बार पार्षदों के
आग्रह पर भी मीटिंग का आयोजन नहीं होता। कभी प्रशासनिक अधिकारियों के पास
टाइम नहीं होता तो कभी मंत्री या सीएम का दौरा होने से मीटिंग टल जाती है।
जो शहर के विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा है।
जोगिंद्र सिंह वार्ड पार्षद- 20