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पार्षद से बोलीं मेयर, गेट आउट फ्रॉम हेयर

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करीब तीन माह बाद हुई नगर निगम हाउस की बैठक में 40 प्रस्ताव हंसी और ठहाकों के बीच पास हो गए। जैसे ही आउट ऑफ एजेंडे के तहत वार्ड नंबर एक के पार्षद राकेश उर्फ बाघ सिंह ने मेयर रेणु बाला गुप्ता के पति ब्रज गुप्ता व अन्य पर बकाया निगम के टैक्स का मुद्दा रखा तो सदन में सन्नाटा छा गया।
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कई बार पार्षद को यह मुद्दा रखने से रोका गया, आखिरकार पार्षद ने मुद्दा रखा तो हंगामा हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि मेयर रेणु बाला गुप्ता आपा खो बैठीं। गुस्साई मेयर ने पार्षद बाघ सिंह को यहां तक कह दिया कि गेट आउट फ्रॉम हेयर। इसी बात पर सदर में जमकर हंगामा हुआ। अन्य पार्षदों ने भी मेयर के रवैये पर विरोध किया। आखिरकार हंगामे के बीच में पार्षद उठकर चले गए और बैठक समाप्त हो गई।

 सुबह 11.30 बजे शुरू हुई सदन की बैठक शांतिपूर्ण माहौल में चली। सभी प्रस्तावों पर पार्षदों ने राय रखी और सारे प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिए। इसके बाद वार्ड नंबर एक के पार्षद बाघ सिंह ने भरे सदन में कागजात पेश कर दावा किया कि मेयर के पति समेत अन्य लोगों ने केबल टैक्स का निगम को भुगतान नहीं किया है। इसको लेकर वर्ष 2010 में नगर परिषद व तत्कालीन डीसी द्वारा नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन रुपये की रिकवरी नहीं हुई है।
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इसकी रिकवरी की जाए। पार्षद ने दावा किया कि पिछले छह साल का हिसाब लगाया जाए तो यह राशि करोड़ों में बनती है। जैसे ही पार्षद ने यह बात कही तो पहले मेयर ने पार्षद को यह पर्सनल मुद्दा कहते हुए इंकार कर दिया। जब पार्षद अपनी बात पर अड़ा रहा तो मेयर ने कहा कि गेट आउट फ्रॉम हेयर। हालांकि, पार्षद बाघ सिंह ने जाने से इंकार कर दिया और सदन में बात रखने की जिद की।

काफी हंगामे के बीच पार्षद ने बात रखी। उधर, मेयर द्वारा बाहर जाने के शब्द कहने के कारण डिप्टी मेयर मनोज वधवा ने कड़ा ऐतराज जताया और सदन से वाकआउट करने की चेतावनी दी। डिप्टी मेयर ने बार-बार मेयर से मांग की कि वे सदन से इस मामले में माफी मांगे। करीब आधे घंटे तक हंगामे से न तो मेयर ने कुछ कहा और न ही पार्षदों ने शोर कम किया। आखिरकार पार्षदों ने बैठक का विरोध कर दिया और बायकाट करने निकले।

हालांकि, आयुक्त सुमेधा कटारिया ने स्थिति को संभाला और मामले की जांच का आश्वासन देते हुए बैठक समाप्त करने की घोषणा की। सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग भी डिप्टी मेयर और बाघ सिंह को समझाने की कोशिश करते रहे। एक बार तो वे भी सीट से उठ खड़े हुए। उधर, कमलेश लाठर व सतीश कुमार ने भी पार्षद बाघ सिंह का विरोध किया और एक मामले की बजाए सभी के मामले रखने की मांग की। इस दौरान पार्षदों में नोकझोंक हुई। दो बजे बैठक समाप्त हो गई।

वर्जन
यह मेरा व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है। यह पूरे निगम का मुद्दा है, क्योंकि बकाया पैसा मेरी जेब में नहीं बल्कि निगम के पास आना है। उससे ही शहर में विकास कार्य होने हैं। कुछ लोग इस मामले को जान बूझकर दबा रहे हैं, जबकि दस्तावेज गवाह हैं कि मेयर के पति समेत अन्य लोग टीवी केबल प्रसारण के लिए 60 से 70 करोड़ के देनदार हैं। निगम को यह रिकवरी करना चाहिए।
राकेश बाघ सिंह, पार्षद।

वर्जन
यह बहुत खेदजनक घटना है। मेयर किसी भी पार्षद को सदन से बाहर जाने के लिए नहीं कह सकती हैं। मैं केबल मामले में बकाया टैक्स की जांच की मांग करता हूं, साथ ही उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता हूं। इसके अलावा यह भी मांग करता हूं कि जिन लोगों पर करोड़ों रुपये बकाया हैं, निगम उनसे निर्धारित अवधि में पैसे रिकवर करे, ताकि निगम का राजस्व बढ़ सके।
मनोज वधवा, डिप्टी मेयर।

निगम अधिकारी लेते 10 प्रतिशत कमीशन : सतीश
बैठक के दौरान एक और खास वाक्या हुआ। सदन में गोधाम के लिए मदद की अपील की जा रही थी, जिस पर सभी पार्षदों ने एक-एक माह का मानदेय या फिर एक-एक माह का खर्च देने की बात कही। इसका सभी ने स्वागत किया। वहीं, इसी दौरान वार्ड नंबर 15 के पार्षद सतीश कुमार ने कहा कि पार्षद तो मदद कर रहे हैं, लेकिन निगम के अधिकारी और कर्मचारी इसमें कोई योगदान नहीं दे रहे, जबकि निगम के अधिकारी दस प्रतिशत कमीशन लेते हैं।

इस पर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सदन में इस तरह की बातें न रखी जाएं। हालांकि, पार्षद राकेश उर्फ बाघ सिंह ने कहा कि ठेकेदार इस बात की तस्दीक करते हैं कि अधिकारी कमीशन लेते हैं। इस पर काफी देर तक सदन में सन्नाटा छाया रहा।
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