करनाल। सरकार ने कई अनाज मंडियों में 24 घंटे खरीद रोककर भी लिफ्टिंग कराई लेकिन इसके बाद भी हालातों में कोई खास सुधार नहीं आया है। करनाल, तरावड़ी, इंद्री, कुंजपुरा जैसी बड़ी मंडियों में गेहूं की भरमार देखी जा रही है। यह स्थिति तब है जब शासन ने यूपी आदि सीमावर्ती राज्यों से आने वाले गेहूं पर रोक लगा रखी है। सिर्फ शेड्यूल के मुताबिक चंद किसानों को ही हरियाणा में इंट्री मिल पा रही है। वहीं बारदाना की कमी से आढ़तियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
करनाल की अनाज मंडी में मंगलवार को जहां 105174.4 मीट्रिक टन गेहूं की लिफ्टिंग की गई थी, वहीं बुधवार को लिफ्टिंग 142713.1 मीट्रिक टन लिफ्टिंग की गई। इसके बावजूद जिले की अनाज मंडियों में 339011.10 मीट्रिक टन गेहूं खुले में पड़ा है, जिसका उठान अभी तक नहीं हो पाया है। सूत्रों के मुताबिक मंडियों में ऐसे हालात बनाए गए कि सरकार एफआईएफओ यानी फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट सिस्टम को खत्म करके लिफ्टिंग का अधिकार खरीद एजेंसियों को देना पड़ा। अब खरीद एजेंसियां अपने चहेते आढ़तियों को ही पहले ट्रांसपोर्ट उपलब्ध करा रही हैं, जो आढ़ती खरीद एजेंसियों के निरीक्षकों से सांठ-गाठ नहीं कर रहे हैं, उन्हें वाहन देरी से मिल रहे हैं, जिससे उनके गेहूं का उठान नहीं हो पा रहा है।
आढ़ती मांग रहे बारदाना, एजेंसियां कह रहीं मंडियों में खाली पड़ी लाखों बोरी
करनाल। एक तरफ तो आढ़ती कह रहे हैं कि अनाज मंडियों में आढ़तियों को बारदाना नहीं नहीं मिल रहा है, जिससे गेहूं की खरीद प्रभावित हो रही है। बड़ी मात्रा में गेहूं खुला पड़ा है। वहीं दूसरी ओर खरीद एजेंसियों का दावा है कि आढ़तियों को बड़े पैमाने पर बारदाना उपलब्ध कराया गया है, जिसका अभी आधा उपयोग भी नहीं किया गया है। जब पहले से आढ़तियों के पास पर्याप्त बारदाना है तो फिर और बारदाना कैसे उपलब्ध कराया जाएगा।
अनाज मंडियों में लिफ्टिंग पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रही है, जिससे मंडियों में जगह नहीं बची है। कई आढ़ती ऐसे हैं, जिनकी दुकान के आगे पैर रखने की जगह नहीं बची है। ऐसे में किसानों का गेहूं कहां उतारा जाए। ऊपर से खरीद एजेंसियां पर्याप्त बारदाना नहीं दे पा रही हैं।
-रजनीश चौधरी, प्रधान नई पंचायत आढ़ती एसोसिएशन करनाल।
-लिफ्टिंग की बड़ी समस्या है, बारदाना का भी अभाव तो है लेकिन फिलहाल काम चल रहा है। यूपी का गेहूं भी नहीं आ पा रहा है। आज ही हैफेड के जिला प्रबंधक से मिलकर बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने व शीघ्रता लिफ्टिंग कराने की मांग की है।
-धर्मबीर पाढ़ा, प्रधान नई पंचायत आढ़ती एसोसिएशन करनाल (दूसरा गुट)
-इस साल हैफेड का खरीद लक्ष्य 12 लाख बोरी खरीदने है, जिसमें 10.20 लाख बैग अभी तक करनाल अनाज में सक्रिय दोनों आढ़ती एसोसिएशनों को उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि अभी तक सात लाख बोरी ही भरी गई है। सिर्फ करनाल अनाज मंडी में 3.55 लाख बोरी बारदाना आढ़तियों के पास उपलब्ध है, इसलिए यह कहना सरासर गलत है कि करनाल मंडी में बारदाना नहीं है।
-सुरेश कुमार वैद, जिला प्रबंधक हैफेड करनाल।
अधिकारी नहीं मिले तो विधायक से मिले आढ़ती
करनाल। कुंजपुरा अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान व सदस्य आढ़तियों ने बारदाने की समस्या को लेकर बुधवार को उपायुक्त व खरीद की नोडल अधिकारी एडीसी के आवास पर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों के नहीं मिलने पर आढ़ती इंद्री के विधायक राम कुमार कश्यप से उनके आवास पर जाकर मिले। बारदाना सहित सभी समस्याओं के समाधान की मांग की। प्रतिनिधि मंडल की अगुवाई मार्केट कमेटी कुंजपुरा के पूर्व चेयरमैन ईलम सिंह ने की।
बारदाने के अभाव में खरीद बंद, कांग्रेस ने साधा निशाना
घरौंडा। नई अनाज मंडी में बारदाने की कमी के कारण सरकारी एजेंसी ने खरीद बंद कर दी है, जिसमें किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता वीरेंद्र सिंह राठौर ने मंडी का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुनी। आरोप लगाया कि सरकार के गेहूं खरीद के जो वादे व तैयारी थी, वह धरी की धरी रह गई हैं।
मंडी के प्रधान रामलाल गोयल ने कहा कि मंडी में बारदाने की कमी चल रही है। जिससे मजदूर, किसान व व्यापारी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को नई अनाज़ मंडी में कांग्रेस नेता वीरेंद्र सिंह राठौर ने दुकान नंबर 17 पर पत्रकारों से बातचीत की। कहा कि 24 घंटे में मंडी में बारदाना उपलब्ध कराए, ताकि लोगों को राहत मिल सकें। इस अवसर पवन गुप्ता, रोहित गोयल व अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यूपी से सस्ता गेहूं लाकर एमएसपी पर बेचने का शुरू हो गया खेल
करनाल। उत्तर प्रदेश से गेहूं को हरियाणा लाकर सस्ते में खरीदा जा रहा है, जिसे सरकारी रेट पर बेचे जाने की आशंका है। क्योंकि सरकार ने पहले से ही आढ़तियों को प्रति एकड़ पैदावार से अधिक उत्पाद तोलने की छूट दी गई है। इसी आशंका को देखते हुए जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने यूपी के सहारनपुर जिले से 1910 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदकर लाए जा रहे 182 क्विंटल गेहूं लेकर आ रहे ट्रैक्टर ट्राली को मंगलौरा बार्डर पर पकड़ लिया। पुलिस को बुलाया अभिलेखों की जांच की गई। घंटों तक चली जांच के बाद गेहूं को क्लीन चिट दे दी गई। बताया गया कि गेहूं को फ्लोर मिल के खरीदकर लाया जा रहा था।
हरियाणा सरकार ने पिछले दिनों आढ़ती एसोसिएशन के साथ बातचीत में प्रति क्विंटल उत्पादन को 20 क्विंटल से बढ़ाकर 30 क्विंटल कर दिया है। 10 प्रतिशत पहले से ही कम ज्यादा की छूट रहती है। कुल मिलाकर प्रति एकड़ अब 33 क्विंटल गेहूं बेचा जा सकता है। जबकि इतनी पैदावार तो पूरे तो पूरे हरियाणा राज्य में कहीं पर भी नहीं है। इस छूट का आढ़ती लाभ उठा कर रहे हैं। यूपी से सस्ता गेहूं खरीद कर एमएसपी पर बेचने का खेल शुरू हो गया है। मंगलौरा बार्डर पर जब सहारनपुर से आ रहा ट्रैक्टर पकड़ा गया तो उसके पास जसवीर ट्रेडिंग कंपनी असंध रोड कोहंड के नाम की बिल्टी थी। जिस पर 303 कट्टे यानी 182 क्विंटल गेहूं अंकित था, जिसे 1910 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदकर लाया गया था। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम ने गेहूं लाने वाले व खरीदने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए शिकायत भी दे दी लेकिन पुलिस मौके पर पहुंची और घंटों तक जांच करने के बाद बताया कि बिल्टी व अन्य अभिलेख सही है। इसे फ्लोर मिल के लिए खरीदकर लाया गया था। इसके बाद ट्रैक्टर ट्राली को छोड़ दिया गया।