संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। तीन महीने में ऐसे बच्चों में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मई में ऐसे बच्चों की संख्या 680 हो चुकी है।
महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों की जांच चल रही है इनमें 0-6 साल तक के बच्चों की मानकों के आधार पर जांच की जा रही है, जो बच्चे गंभीर अवस्था में मिलेंगे, उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।
पोषण अभियान के अंतर्गत पोषण साथी अभियान शुरू किया गया, जिसमें कुपोषित बच्चों का पुन: जांच करना और नए बच्चों की जांच करना शामिल है। महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी सीमा प्रसाद ने बताया कि यह अभियान छोटे बच्चों की देखभाल के लिए शुरू किया गया था जिसमें समय-समय पर जांच होती रहती है।
पोषण ट्रैकर एप से जिले में सभी कुपोषित बच्चों की जांच की जा रही है जिसमें कई बच्चे कुपोषित पाए और उन्हें नागरिक अस्पताल के एनआरसी में रेफर किया गया। इनमें कुछ बच्चे कम कुपोषित निकलते हैं जिनमें बच्चों की देखभाल के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाता है। इसके अलावा पहले से कुपोषित बच्चों के ठीक होने की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है।
इन मानकों पर हो रही जांच : जांच के दौरान बच्चों में सामान्य तौर पर कम वजन, कम लंबाई और लंबे समय से बीमार चल रहे बच्चों की जांच की जा रही है। इनमें गांव-गांव जाकर छोटे बच्चों की शारीरिक समस्याओं का परीक्षण कर उन्हें कुपोषित या अतिकुपोषित की श्रेणी में रखा जाता है।
बच्चों के शरीर में पोषण, न्यूट्रिशन और कई चीजों की जांच की जा रही है। सीमा प्रसाद ने बताया कि बच्चों का मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरूरी है।