स्थानीय निकाय विभाग ने छोटी सरकार यानी नगर पालिकाओं के चेयरमैन सीट के आरक्षण को लेकर ड्रा निकाल दिए हैं। लेकिन ड्रा से तय हुई सीटों ने जिले की विभिन्न नगर परिषदों में समीकरणों को बदल दिया है। इससे जहां सभी सीटों पर चेयरमैन पद के लिए अनेक नए दावेदार सामने आएंगे, वहीं चेयरमैनी का ख्वाब देख रहे कई दिग्गजों के अरमान पूरे नहीं हो पाएंगे।
ड्रा में पिछले प्लान में आरक्षित रही निसिंग और तरावड़ी की सीट इस बार सामान्य वर्ग की होगी। जबकि असंध की सामान्य वर्ग की सीट इस बार एससी को मिली है। वहीं 1978 में गठित घरौंडा नगर पालिका जिले की सबसे पुरानी सीट इस बार भी सामान्य वर्ग की झोली में आई है। जिले में यह एक ऐसी सीट है, जहां हर वर्ग का महिला पुरुष एक बार चेयरमैन बन चुका है। इसी तरह अन्य तीनों सीटों में से तरावड़ी सीट पर महिलाओं का कब्जा रहा है। पुरुष को प्रधान बनने का मौका तब मिला जब मौके की प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। अब पहली बार इस सीट पर सामान्य वर्ग का चेयरमैन होगा। चेयरमैन पद के ड्रा के साथ ही नगर परिषद चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होनी शुरू हो गई हैं।
मेयर की तर्ज पर सीधे चुने जाएंगे चेयरमैन
नगर परिषद के चेयरमैन चुनाव में इस बार सीधे आम जनता वोट डालेगी। पहले चेयरमैन को नगर पार्षद चुनते थे परंतु अब सरकार ने संशोधन कर दिया है। इस बार नगर परिषद व नगर पालिका चुनाव में आम जनता पार्षद के साथ-साथ चेयरमैन पद के लिए भी वोट डालेगी।
हर वर्ग का चेयरमैन देने वाली सीट इस बार भी जनरल
घरौंडा : 1978 में गठित घरौंडा नगर पालिका सीट पर वर्तमान में जनरल वर्ग का चेयरमैन है। अगला चेयरमैन भी इसी वर्ग का होगा। यहां का सदन आज भंग होगा। पिछले 20 साल में 2021 तक इस सीट पर जरनल, 2016 तक एससी, 2011 तक महिला और 2006 तक बीसी वर्ग का चेयरमैन रहा।
1995 और 2013 में लाए अविश्वास प्रस्ताव
तरावड़ी। : इस नगर पालिका का चेयरमैन पहली बार सामान्य वर्ग का होगा। यहां 1995 के बाद से अभी तक महिलाएं ही प्रधान पद पर आसीन होती आई हैं। इस दौरान दो पुरुषों को कुछ समय के लिए अवसर उस सूरत में मिला जब महिला प्रधान को हटाने के बाद उपप्रधान को प्रधान पद पर कमान सौंपी गई। 1995 में पद ओपन महिला के लिए आरक्षित था, तो अनुसूचित जाति की महिला परमेश्वरी देवी प्रधान बनीं। दो साल के बाद ही पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लाए तो उपप्रधान राजपाल जांगड़ा को कार्यकारी प्रधान बनाया गया। आखिरी एक साल में शेरो देवी बाजवा प्रधान बनीं। जून 2000 में नीलम रानी, 2005 में उर्मिल मल्होत्रा और 2010 में अनुसूचित जाति से महिला प्रवीन रानी प्रधान रहीं। दो साल बाद 2013 में अविश्वास प्रस्ताव के सात माह बाद उप प्रधान वीरेंद्र बंसल प्रधान बने। 2016 से अब तक अनुसूचित जाति से रेखा कबीरपंथी अध्यक्ष रही।
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होगा तीसरा कार्यकाल, आरक्षित होने पर था संशय
निसिंग। निसिंग नगरपालिका में सामान्य वर्ग की झोली में आई है। हालांकि सीट को लेकर लोगों में संशय था कि कहीं आरक्षित वर्ग के खाते में न चली जाए। 2011 में बनी निसिंग नपा का पहला चुनाव सामान्य वर्ग व दूसरा आरक्षित एससी वर्ग के उम्मीद्वारों में लड़ा गया था। अब यह नपा का तीसरा कार्यकाल होगा। यहां से पांच व्यक्ति चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे है।
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सामान्य से खिसक कर एससी महिला को सीट
असंध। असंध नगर पालिका से इस बार चेयरमैन की सीट एससी के लिए आरक्षित हुई है। 2000 में गठित नगर पालिका के पिछले प्लान में सामान्य वर्ग से दीपक छाबड़ा चेयरमैन थे। इससे पहले एससी वर्ग के लिए सीट आरक्षित थी। यहां की पहली चेयरमैन किताबो देवी रहीं।