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Karnal News: हादसे में गंवाया पैर, हौसले से जीता स्वर्ण संघर्ष से स्वर्ण तक

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नीतेश के पिता विजेंद्र को मिठाई ​खिलाड़ी उनकी माता प्रेमकाैर । संवाद
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करनाल। जिंदगी में आए एक हादसे ने नीतेश कुमार से उनका पैर छीन लिया। यह हादसा खेल के प्रति उनका जुनून और आगे बढ़ने का हौसला नहीं छीन सका। फुटबॉल खिलाड़ी से बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय सितारे तक का उनका सफर संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत की मिसाल है। जापान के आइची प्रांत और नागोया शहर में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में नीतेश ने एसएल-3 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी मेहनत को नई पहचान दी है। फाइनल में उन्होंने भारत के ही खिलाड़ी प्रमोद भगत को 21-16 से हराया। मिश्रित युगल में भी उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया।
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नीतेश की इस उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। परिजन ने मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। पिता विजेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उन्होंने बताया कि नीतेश इससे पहले पैरा एशियाई खेलों में रजत और कांस्य पदक जीत चुके हैं। इस बार उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया है। उन्होंने बताया कि पेरिस पैरालंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद नीतेश ने एशियाई खेलों की तैयारी शुरू कर दी थी। लगातार अभ्यास और मेहनत का परिणाम अब पैरा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।


शुरुआत से ही दिखाया दम

नीतेश ने प्रतियोगिता की शुरुआत दोहरी सफलता के साथ की। मिश्रित युगल में अपनी साथी थुलसिमाथी मुरुगेसन के साथ खेलते हुए उन्होंने विपक्षी टीम को 21-18 से हराकर पहला मुकाबला जीता। एकल वर्ग में भी उन्होंने दक्षिण कोरिया के जू डोंग-जाए को सीधे सेटों में 21-15 से शिकस्त देकर अगले दौर में जगह बनाई।
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क्वार्टर फाइनल में उनका सामना भारत के उमेश कुमार से हुआ। नीतेश ने इस मुकाबले में 21-8 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इसके बाद सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के इमरान मुहम्मद अली को 21-19, 21-16 से हराकर फाइनल में जगह पक्की की। खिताबी मुकाबले में प्रमोद भगत को हराकर उन्होंने एकल वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया।



नीतेश आईआईटी मंडी से पढ़ाई कर रहे थे। फुटबॉल खेलते थे। 2014 में हुई एक दुर्घटना में पैर गंवा दिया था। उन्होंने हार नहीं मानी और खेलों में अपना भविष्य तलाशा। वर्ष 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2019 में उनका चयन खेल विभाग में हुआ। फिलहाल वह करनाल के कर्ण स्टेडियम में बैडमिंटन कोच के रूप में कार्यरत हैं और हैदराबाद में प्रशिक्षण लेते हैं।



अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता



नीतेश ने वर्ष 2016 में पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। वर्ष 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीत दर्ज की। वर्ष 2018 के एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया। वर्ष 2019 और 2022 में विश्व चैंपियनशिप में रजत और कांस्य पदक जीते। वर्ष 2023 में स्पेन ओपन लेवल-दो के युगल मुकाबले में कांस्य पदक अपने नाम किया। वर्ष 2024 के पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया।
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