करनाल। नियम 134ए के तहत पूरी तैयारी के बाद भी जिले के सैकड़ों विद्यार्थी निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा के लाभ से वंचित रहेंगेे। अभिभावकों की छोटी सी गलती ने विद्यार्थियों का यह नुकसान कर दिया है। हालांकि विद्यार्थियों को इस बात का अभी पता नहीं है कि पात्रता के लिए कल होने वाली प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद भी उनका दाखिले के लिए काम नहीं बनेगा।
नियम के अनुसार आवेदन फार्म में चालू कक्षा के लिए आवेदन किया जाना था, लेकिन आवेदन फार्म में कई अभिभावकों ने विद्यार्थियों की अगली कक्षा का विकल्प भर दिया। इसके तहत रोल नंबर भी जारी हो चुके हैं और विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र भी आवंटित किए जा चुके हैं। ऐसे में परीक्षा पास करने के बाद भी उन्हें दाखिला नहीं मिल सकेगा, क्योंकि नियम 134ए के तहत प्रवेश की प्रक्रिया इसी सत्र के लिए ही है। चालू सत्र में प्रक्रिया शुरू होने से इसी सत्र की कक्षाओं में ही विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाना है। फार्म पूरा भरा होने से 4028 विद्यार्थियों को रोल नंबर अलॉट हुआ है। जो पांच दिसंबर को 14 केंद्रों पर होने वाली परीक्षा में हिस्सा लेंगे।
904 विद्यार्थियों के फार्म ही जमा नहीं हुए
इस बार दाखिले के लिए सभी छह खंडों से कुल 4932 आवेदन फार्म आए। जिनमें 4028 ही फार्म योग्य मिले, जिनका प्रवेश परीक्षा के लिए चयन कर लिया गया। लेकिन अब रोल नंबर और केंद्र आवंटित होने के बाद विभाग की जांच में अब नई गलतियां सामने आई हैं। जबकि 904 विद्यार्थी नियमों को पूरा नहीं कर पाए। इनमें गलती के कारण 30 आवेदन शुरू में रिजेक्ट हुए और 261 ने फार्म ही अधूरा होने के कारण जमा नहीं हुआ।
परीक्षा से बचने के लिए छिपाई जानकारी
नियम के अनुसार परीक्षा केवल निजी स्कूलों के पिछली कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ही देनी होती है। सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को पिछली कक्षा के परीक्षा परिणाम के आधार पर ही दाखिला दिया जाता है। ऐसे में परीक्षा से बचने के लिए कई विद्यार्थियों ने निजी स्कूल से पढ़ने की जानकारी भी छिपाई है। विद्यार्थियों ने आवेदन फार्म पिछली कक्षा के विकल्प में निजी स्कूल के नाम के बजाय सरकारी का लिख दिया। इससे ऐसे विद्यार्थियों को भी परीक्षा देने के बाद दाखिला नहीं मिलेगा।
शिक्षा विभाग के बजाय विधानसभा के हिसाब से भर दिया खंड
करनाल में विधानसभा के हिसाब से पांच खंड हैं, जबकि शिक्षा विभाग की व्यवस्था के अनुसार छह खंड हैं। ऐसे में ज्यादातर विद्यार्थियों ने आवेदन फार्म के विकल्प में विधानसभा के हिसाब से खंड भरा है। जबकि दाखिले के लिए स्कूलों का विकल्प शिक्षा विभाग के खंड के हिसाब से किया है। ऐसे में इन विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए दूसरे खंड यानी घर से दूर जाना पड़ेगा। ज्यादातर निसिंग खंड के विद्यार्थियों से यह गलती हुई है। उन्होंने निसिंग खंड के बजाय विधानसभा के हिसाब से नीलोखेड़ी खंड भर दिया है।
दोबारा करनी होगी अगले साल मेहनत
जिन्होंने आवेदन फार्म में कोई भी गलती की है, उन्हें परीक्षा देने के बाद भी नियम के तहत दाखिला नहीं मिल पाएगा। ऐसे विद्यार्थियों को अगले सत्र में दोबारा आवेदन करना होगा। उस दौरान सही फार्म भरकर और परीक्षा पास करके ही दाखिले की दौड़ में शामिल होना पड़ेगा। - रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी