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यमराज का लॉक डाउन, जिले में मौत का आंकड़ा हुआ आधा

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कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए केंद्र सरकार की ओर से देशभर में लाकडाउन किया गया है, वहीं करनाल श्मशान घाट पर यमराज का लाकडाउन चल रहा है। शायद यही कारण है कि इन दिनों जिले में होने वाली मौतों का ग्राफ आधा हो गया है। कम से कम आंकड़े तो यहीं बयां कर रहे हैं। पहले जहां प्रतिदिन औसतन 12 लोग श्मशान पहुंचते थे, वहीं 22 मार्च को हुए लाकडाउन के बाद से यह संख्या औसतन छह रह गयी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौत के आंकड़ों में गिरावट आने का मुख्य कारण सड़क हादसे कम होना और शुद्ध हवा है। इसके अलावा, आपसी लड़ाई झगड़े भी कम हो गए हैं, जिससे मौत का ग्राफ गिरा है।
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श्मशान से मिले आंकड़ों के अनुसार शहर के पांच प्रमुख श्मशान घाटों में लॉकडाउन से पहले 16 दिनों में 212 के करीब लोगों के अंतिम संस्कार होते थे, लेकिन 22 मार्च से 6 अप्रैल तक लॉकडाउन के दिनों में 106 लोगों के ही संस्कार हुये हैं। इनमें से 3 लोगों की मौत दुर्घटना में हुई है तो अधिकतर की लंबी बीमारी व बुजुर्ग होने के कारण हुई है। खास बात ये है कि इन 106 लोगों में मरने वाले अधिकतर 50 से अधिक उम्र के हैं। इससे अलग 7 बच्चों की भी मौत हुई है, जिन्हें दबाया गया है।
95 लोगों की अस्थियां लॉकर में हुई बंद
लॉक डाउन होने के कारण पांच शमशान घाट में 95 लोगों की अस्थियां लॉकर में बंद हैं, जो हरिद्वार में गंगा में बहाने के लिए रख दी गई हैं। शमशान घाट के प्रधानों का कहना है कि जब लॉक डाउन खत्म होगा तो उनके परिजनों को अस्थियां दे दी जायेंगी और फिर उन्हें हरिद्वार में गंगा में बहा दिया जायेगा। आदर्श सभा काछवा रोड शिवपुरी के प्रधान डा. सुरेश सरदाना और श्मशान सुधार सभा हांसी रोड भूपेंद्र बाली ने कहा कि लॉॅकडाउन के चलते रोजाना होने वाली मौतों में काफी कमी आई है।
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इसके अलावा, श्री सेवक सभा बाबा मस्तगिरी अखाड़ा, जुंडला गेट, नारायण गोयल व पंडित हीरालाल, माडल टाउन शिवपुरी के सेवक मनोज शर्मा ने बताया कि पहले कि बजाए अब रोजाना कम लोगों की मौत हो रही है, जो अच्छी बात है। लोगों को लॉॅकडाउन का पालन करना चाहिए, ताकि ये आंकड़ा और कम हो।
श्री राम कृष्ण संकीर्तन मंडल रजी अर्जुन गेट के वरिष्ठ उपप्रधान श्यामसुंदर व मोहनलाल ने बताया कि लॉॅकडाउन से पहले ज्यादा मौतें होती थीं। मंडल के आंकड़े इस बात के गवाह हैं। अब जब से लॉॅकडाउन हुआ है, मौतों का आंकड़ा आधा रह गया है, इसलिए पहले की बजाए कम लोगों के अंतिम संस्कार हो रहे हैं। जिले के लोगों को चाहिए वे लॉॅक़डाउन का पालन करें और मौत के आंकड़े और पीछे लाएं।
मौत का आंकड़ा कम होना बड़ी बात है, लोगों को चाहिए कि वे 14 अप्रैल तक घरों पर ही रहें, तभी वे सुरक्षित हैं और दूसरे भी सुरक्षित हैं। हो सके तो कम से कम मूवमेंट करें और कम से कम लोगों को मिलें, क्योंकि जान है तो जहान है। लाकडाउन के कारण एक तो हादसे नहीं हो रहे हैं, दूसरा लड़ाई झगड़ों के केसों में कमी आई है, जिससे मौतों का ग्राफ गिरा है। -सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी।
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