विश्व हास्य दिवस
हंसने से शरीर में एंडोर्फिन्स नामक हार्मोन होता है रिलीज, मिलती है प्रसन्नता और ऊर्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। हास्य योग मानसिक तनाव कम करने में कारगर साबित हो रहा है। योग शिक्षक दिनेश गुलाटी ने बताया कि हंसने से शरीर में एंडोर्फिन्स नामक हार्मोन रिलीज होता है जो प्रसन्नता और ऊर्जा देता है। हर व्यक्ति को रोज प्रात: 20 से 25 मिनट खुले आसमान के नीचे खुल कर हंसना चाहिए। इससे रक्त का संचार सही से होता है, नाड़ी कोशिकाएं खुलती हैं और शरीर रोग मुक्त रहता है। उन्होंने बताया कि योग में हास्य आसन और लाफ्टर योग जैसे अभ्यास आज जरूरत बन चुके हैं।
हास्य संस्कृति हरियाणा की खास पहचान रही है। जैमिनी हरियाणवी, आजाद सिंह दुहन और अरुण जैमिनी जैसे कवियों ने हरियाणवी हास्य को ऊंचाई दी है, लेकिन मौजूदा दौर में ठहाके और खिलखिलाती हंसी मोबाइल फोन की स्क्रीन के पीछे छिप गई है। व्यक्ति भीड़ में रहकर भी अकेला हो गया और उसकी मुस्कान छिन चुकी है। इसका विपरीत प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है, ऐसे में लोग अब बनावटी हंसी तलाश रहे हैं। इसी जरूरत ने हास्य योग को जन्म दिया है, जो काफी प्रचलित हो रहा है।
एक समय था जब गांव की चौपालों से लेकर शहरों के चौराहों तक सहज हास्य सुनाई देता था। हरियाणा में हास्य हमेशा से सामाजिक संवाद का एक मजबूत माध्यम रहा है। चाहे वो हरियाणवी रागनी हो या हास्य कवि सम्मेलन, लोगों ने हंसी में व्यंग्य ढूंढ़ा, आलोचना की और समाज को आईना दिखाया। हरियाणा की पहचान बन चुके कई हास्य कवियों, कलाकारों ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है।
सुरेंद्र शर्मा जिनका चाय लो मीठी लगे तो शक्कर मत डालना वाला अंदाज आज भी लोगों की जुबान पर है, मूल रूप से हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं। राजू श्रीवास्तव के साथ मंच साझा करने वाले हरियाणवी कलाकार नवीन सैनी ने भी टीवी पर खूब वाहवाही बटोरी।
हास्य कवि सम्मेलनों की जरूरत
कवियत्री डॉ. वनीता चौपड़ा, जो कई अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों का हिस्सा रहीं हैं, ने चिंता जताते हुए कहा कि जिले में बहुत कम हास्य कवि सम्मेलन होते हैं। जिसमें युवा पीढ़ी में हास्य लेखन और मंचीय अभिव्यक्ति की कमी है। इसलिए समय-समय पर हास्य सम्मेलन जरूरत महसूस हो रही है। इससे साहित्य को बढ़ावा मिलेगा, और युवा वर्ग जो मोबाइल तक ही सीमित रह गई वह भी सम्मेलनों में भाग लेंगे। यदि किसी व्यक्ति में हास्य कला होती भी है तो वह केवल फोन में रील्स के माध्यम से अपनी कला बेच देता है। यदि जिला स्तर पर ऐसे सम्मेलन करवाए जाएं तो अवश्य कला का विकास होगा।
तनाव को कम करती है हंसी
मनोचिकित्सक डॉ. सौभाग्य सिंधु बताती हैं कि आज के समय में हर व्यक्ति में मूड डिसऑर्डर रहता है, जिसमें इंसान समय-समय पर हर छोटी बातों पर और परेशानियों में तनाव लेने लगता है। इसके कारण वह अपनी जिंदगी में बहुत कम हंसते हैं। वहीं यदि हर व्यक्ति अपने दिमाग में सकारात्मक सोच रख हर पहलू को देखे तो हंसने की वजह जरूर मिलेगी। आज की पीढ़ी हंसना भूल रही है, जिससे मानसिक तनाव, अकेलापन और डिप्रेशन लगातार बढ़ रहा है।