करनाल में लेबर कार्यालय ने कर्मचारियों को कम वेतन देने की शिकायत पर शहर के करनाल क्लब को नोटिस जारी किया है।
क्लब के अधिकारियों को पूरे रिकॉर्ड के साथ लेबर कार्यालय में पेश होने के आदेश दिए गए हैं। क्लब में काफी संख्या में अनुसूचित जातियों के कर्मचारी काम करते हैं लेकिन उन्हें न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जाती। कर्मचारियों का कहना है कि कई साल से वे क्लब में काम कर रहे हैं।
अधिकारी यहां उनका शोषण करते हैं लेकिन नौकरी जाने के भय से वे कुछ नहीं बोलते। आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों ने हौसला दिखाकर करनाल के लेबर ऑफिस में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए लेबर ऑफिस ने कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।
कर्मचारियों ने अपनी पूरी व्यथा अधिकारियों के सामने बयान की। लेबर ऑफिस ने बयानों के आधार पर संज्ञान लेते हुए करनाल क्लब के अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन जनवरी को रिकॉर्ड समेत विभाग में तलब किया है।
डीसी हैं क्लब के अध्यक्ष
करनाल क्लब में शहर के मौजिज लोग और प्रशासनिक अधिकारी सदस्य हैं। किसी भी संस्थान में कर्मचारियों को निर्धारित डीसी रेट से कम वेतन देने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रतिष्ठानों और संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लेबर ऑफिसर भी छापामारी करते हैं पर करनाल क्लब, जिसके अध्यक्ष डीसी हैं, वहीं, कर्मचारियों को डीसी रेट पर वेतन नहीं दिया जा रहा।
कर्मचारी ब्रह्मपाल, अनिल, वीर सिंह, महेंद्र, मितलेश, रामू, संजीव, सन्नी, अमित, प्रवीण, जसमेर, तिलकराज, विनोद और राजेश का आरोप है कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों को 3100, 3300, 3200, 3600, 3700 और 3800 रुपये वेतन मिलता है। माह में एक दिन का भी अवकाश नहीं दिया जाता।
मुफ्त लड़ेंगे शोषितों की लड़ाई
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने कहा कि समाज में बहुत सारे ऐसे संस्थान हैं, जहां पर अनुसूचित जाति के लोगों का भरपूर शोषण हो रहा है, जो सरासर गलत है।
उन्होंने बीड़ा उठाया है कि ऐसे शोषित समाज की हरसंभव मदद करेंगे और उनको अपनी सेवाएं निशुल्क प्रदान करेंगे ताकि ऐसे लोग साहस दिखाएं और अपने अधिकारों के लिए लड़ें।