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बिना डिग्री क्लीनिक चलाने वाले पूर्व लैब टेकभनीशियन को स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा

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बिना डिग्री और प्रैक्टिस प्रमाण पत्र के क्लीनिक चलाने वाले स्वास्थ्य विभाग के एक पूर्व लैब टैक्नीशियन को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पकड़ा है। शिकायत के आधार पर टीम ने आरोपी के क्लीनिक पर छापा मारा। इस दौरान वहां बरामद हुई 32 तरह की दवाइयों का बिल भी आरोपी नहीं दिखा सका। इन दवाइयों को सील किया गया है। पुलिस ने आरोपी जवाहर खत्री के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
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सिविल सर्जन डॉ. योगेश शर्मा ने बताया कि पिछले दिनों मीरा घाटी में चल रहे जेजे क्लीनिकल लैबोरेटरी के खिलाफ उन्हें शिकायत मिली थी। इसी आधार पर टीम का गठन किया गया। वीरवार को उप सिविल सर्जन डा. नरेश करडवाल के नेतृत्व में टीम ने क्लीनिकल लैबोरेटरी पर छापा मारा। वहां कई प्रकार की दवाइयां मिली लेकिन डाक्टर के पास न तो डिग्री न प्रैक्टिस करने का सर्टिफिकेट पाया गया। उसके पास केवल लैब टैक्नीशियन का डिप्लोमा था। आरोपी स्वास्थ्य विभाग से ही लैब टैक्नीशियन के पद से रिटायर्ड है। जांच टीम में पॉली क्लीनिक की चिकित्सा अधिकारी डा. नीरू, औषधि नियंत्रण अधिकारी रितु मेहला, सहायक अर्चना रानी, प्रोजेक्टनीश सुलेख कुमार और सुभाष सागवाल शामिल रहे।
दवाई खाने से बिगड़ी थी मजदूर की तबीयत
जांच टीम के सामने ही कई लोगों ने क्लीनिकल लैबोरेटरी संचालक द्वारा गलत दवा देने के आरोप लगाए। मायूर अरोड़ा का आरोप है कि उनके मजदूर को जो दवा दी गई थी। उससे उसकी तबियत और बिगड़ गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नॉट फॉर सेल वाली ऐसी दवाएं भी मरीजों को दी जाती हैं, जो केवल सरकारी अस्पताल से ही मिलती हैं।
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सरकारी अस्पताल से प्रतिदिन बहुत से मरीजों को दवाइयां मिलती हैं। वो कई व्यक्तियों के पास हो सकती हैं, उनका सोर्स कुछ भी हो सकता है। क्लीनिकल लैबोरेटरी द्वारा ऐसी दवाएं दिए जाने के बारे में कुछ नहीं कह सकते। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया है। जो दवाइयां मिली थी उन्हें सील कर कब्जे में ले लिया है। विभाग इसकी जांच करेगा।
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-डॉ. नरेश करडवाल, उप सिविल सर्जन, करनाल
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