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कुलपति कार्यालय पर कुटा का प्रदर्शन

Wed, 20 Nov 2013 04:23 PM IST
करनाल
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 छठे वेतन आयोग की सिफारिशों और पेंडिंग मांगाें को पूरा न करने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ मंगलवार को कुलपति कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
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इस मौके पर संघ ने राज्य सरकार की शिक्षा और शिक्षकों के लिए बनाई गई नीतियां का पुरजोर विरोध किया। शिक्षकों ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर आर्गेनाइजेशन के आह्वान पर शिक्षकों ने धरने में भाग लिया और 26 नवंबर को शिक्षा सदन पर होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेने की अपील की। इस मौके पर शिक्षकों ने विश्वविद्यालय से संबंधित एक मांग पत्र भी विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा।
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 विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक अपनी मांगों के लिए सुबह कुटा कार्यालय पर इकट्ठा हुए और नारेबाजी करते हुए कुलपति कार्यालय पहुंचे। शिक्षकों को संबोधित करते हुए कुटा प्रधान डा. एचके शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की गलत नीतियों और ढुलमुल रवैये के कारण आज शिक्षकों की छठे वेतन आयोग से संबंधित मांग अधूरी पड़ी है।

 सातवां वेतन आयोग सरकार गठित करने जा रही है जबकि पिछले वेतन आयोग की काफी सिफारिशें अब तक लागू नहीं की गई हैं।

रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की मांग
कुटा प्रधान डा. एचके शर्मा ने कहा कि शिक्षकों की मुख्य मांगों में बिना नेट के पीएचडी धारक शिक्षकों को पांच वेतन वृद्धियां देश भर में शिक्षकों को मिलती हैं, लेकिन अफसरशाही के कारण हमारे यहां नहीं मिल रही है। कई विश्वविद्यालयों में रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष है, जबकि राज्य सरकार इस पर विचार ही नहीं कर रही है।

जबकि यूजीसी ने अपनी सिफारिशों में राज्य सरकारों को इसे पूर्ण रूप से लागू करने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में कार्यरत शिक्षकों को गजटिड में कनवर्ट करवाना, एमडीयू और भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय की तर्ज पर यूनिवर्सिटी बीएड कॉलेज, दूरवर्ती शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों को प्रोफेसर के पद पर पदोन्नित, पीएचडी करने वाले शिक्षकों को पे बैंड चार में वेतनवृद्धि देना शामिल है।

सौ प्रतिशत अनुदान दे राज्य सरकार
कुटा प्रधान डा. एचके शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए की विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के वेतन व पेंशन का 100 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार दे।

 कुटा के सचिव डॉ परमेश ने कहा कि सरकार कॉलेज व विश्वविद्यालय के शिक्षकों की मांगों के लिए गंभीर नहीं है। अगर सरकार ने जल्द से जल्द मांगाें को पूरा नहीं किया तो इसके लिए सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
 
दो विश्वविद्यालयों में अलग-अलग नियम क्यों?
उन्होंने कहा कि एमडीयू और भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कॉलेज में शिक्षकों को प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन दिया गया है जबकि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा नहीं किया गया है। एक ही राज्य के दो विश्वविद्यालयों में अलग अलग नियम कैसे हो सकते हैं। '

गुरुजंभेश्चर विश्वविद्यालय में कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहे हैं, शिक्षकों की नियुक्ति सेल्फ फाइनेंस में नहीं होती, जबकि हमारे यहां इसका उल्टा है और शिक्षकों की नियुक्ति सेल्फ फाइनेंस स्कीम में की गई है। सरकार को चाहिए कि वह इन्हें जल्द से जल्द बजटिड पदों में कनवर्ट करे।
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इस मौके पर कुटा उपप्रधान डा. संजीव शर्मा, प्रोफेसर अनिल वशिष्ठ, प्रोफेसर  कुलदीप राणा, प्रोफेसर मंजुषा शर्मा, प्रोफेसर एचएस रणधावा, प्रोफेसर आरएस भट्टी, प्रोफेसर एमएस जागलान, प्रोफेसर मनोज जोशी, प्रोफेसर एनडी शर्मा, प्रोफेसर भगवान सिंह, प्रोफेसर रामकरण, डा. मधुदीप सिंह, डा. ललित नागपाल, डा. महावीर रंगा और बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद थे।
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