माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। महान जरनैल बाबा ज़स्सा सिंह रामगढ़िया की सात मई को करनाल में तीसरी जन्म शताब्दी मनाई जाएगी। इसके लिए रविवार को डेरा कार सेवा में बैठक की गई। दिल्ली से शुरू हो रहे खालसा फ़तह मार्च का तीन मई को करनाल पहुंचने पर भव्य स्वागत करने का निर्णय लिया गया है।
डेरा कार सेवा प्रमुख बाबा सुखा सिंह की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक ज़िले की गुरुद्वारा कमेटियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई, जबकि दूसरी बैठक दोपहर बाद सिख सरपंचों, जिला परिषद, ब्लॉक समिति के सदस्यों व निगम पार्षदों और किसान जत्थेबंदियों के साथ की गई। शाम को सभी धर्मों की सामाजिक संस्थाओं के साथ भी बातचीत की गई। इसमें सरपंच सौंकडा भूपिंदर सिंह, मलही के सरपंच कुलदीप सिंह, पूर्व सरपंच पखाना सतिंदर सिंह चठा, चेयरमैन गुलाब सिंह, किसान नेता जगदीप सिंह औलख, अमृत सिंह बुग्गा आदि ने विचार साझा किए।
बाबा सुखा सिंह ने कहा कि सिख कौम के महान जरनैल बाबा ज़स्सा सिंह रामगढ़िया ने 1783 ईस्वी में बाबा जस्सा सिंह आहलूवालिया व बाबा बघेल सिंह के साथ मिलकर दिल्ली को फ़तह किया था व लाल किले की प्राचीर पर मुग़लिया सल्तनत के परचम को उतार कर खालसाई निशान साहेब लहराया था। जीत की निशानी के तौर पर मुग़लिया शान के प्रतीक तख़्त ए ताऊस, जिस पर बैठ कर औरंगजेब ने गुरु तेग़ बहादुर जी को शहीद करने का हुक्म सुनाया था, उसे तोड़ कर उसके पत्थर को दिल्ली से श्री अमृतसर ले आए थे। इस महान दिवस की याद में बाबा जस्सा सिंह रामगढ़िया जन्म शताब्दी का गठन किया गया। जिसके बैनर तले बड़े स्तर पर शताब्दी गुरमत समागम का आयोजन सात मई को करनाल की नई अनाज मंडी में किया जा रहा है। इनमें सिख कौम के महान रागी भाई गुरदेव सिंह ऑस्ट्रेलिया, श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी भाई शौकीन सिंह, हजूरी रागी भाई शुभदीप सिंह, कौम के प्रसिद्ध ढाडी तरसेम सिंह मोरावाली, ढाडी जत्था भाई गुरप्रीत सिंह लांडरा, सिख इतिहासकार सुखप्रीत सिंह, प्रचारक ज्ञानी शेर सिंह अंबाला, रागी भाई जगमोहन सिंह अंबाला, गुरशब्द प्रचार सभा जम्मू वाले गुरु कीर्तन, गुरु इतिहास सुनाकर शताब्दी समागम में संगत को निहाल करेंगे।
इंटरनेशनल सिख फोरम, शिरोमणि गतका फेडरेशन ऑफ़ इंडिया, रामगढ़िया सभा करनाल के साथ साथ करनाल जिले के सभी संत महापुरुष, धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं इस आयोजन के लिए मिलकर कार्य कर रही हैं। नव चेतना मंच के संयोजक एसपी चौहान ने कहा कि सिख कौम का इतिहास क़ुर्बानियों का इतिहास है। डॉ. लाजपत राय चौधरी ने कहा कि सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया ने अपनी शूरवीरता से इस देश की हज़ारों बहू-बेटियों को अबदाली व नादर शाह के क़ब्ज़े से छुड़वाकर उनके घरों तक पहुंचाया।