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316 राइस मिलों को दिया है मिलिंग के लिए धान

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जिले में 1.70 लाख हेक्टेयर रकबे में करीब 5 लाख 86 हजार मीट्रिक टन धान उत्पादन होता है, जबकि जिले की अनाज मंडियों में करीब 17 लाख 5270 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। बाकी धान किस राज्य से आया और किस किसान का है इसका जवाब किसी के पास नहीं। मंडियों में देश का कोई भी किसान अपनी उपज कहीं भी बेच सकता है। इसकी आड़ में कुछ व्यापारी दूसरे राज्यों से धान लाकर यहां बेचते हैं। आशंका जताई जाती है कि सस्ता धान लाकर उसका एमएसपी लिया जाता है। राइस मिलों में पारदर्शिता से जांच में ही पता चलेगा कि अनाज मंडियों से गेट पास कटवाकर कितनी मात्रा में धान लाया गया।
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राइस मिलर्स को दिए गए धान के स्टॉक की जांच के लिए सरकार व प्रशासन हरकत में हैं। करनाल जिले में 316 राइस मिलों को मिलिंग के लिए 16 लाख 22 हजार 154 मीट्रिक टन धान दिया गया है। इसके एवज में सरकार 67 प्रतिशत चावल लेगी। साथ ही मिलिंग के बदले राइस मिल को उसका मेहनताना देगी। अनाज मंडियों से राइस मिलों में धान जाने के बाद सरकार जांच में जुटी है, लेकिन इसमें क्या सामने आएगा यह खुलासा प्रशासनिक अधिकारी जांच के बाद ही कर सकेंगे। जिले के चार एसडीएम के अधीन जांच चल रही है। बुधवार को किसी भी एसडीएम ने इस संदर्भ में कोई बात नहीं की।
जिले में इस बार सीजन में तीन सरकारी एजेंसियों ने धान खरीदा। डीएफएससी ने 11 लाख 18 हजार 740 मीट्रिक टन, हैफेड ने 3 लाख 8240 मीट्रिक टन व हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन ने 1 लाख 95 हजार 174 मीट्रिक टन धान खरीदा है। एजेंसियों को राइस मिल अलॉट किए जाते हैं। मिलिंग के लिए जिले के 316 राइस मिलों में धान भेजा जा चुका है। चावल की प्राप्ति के लिए राइस मिलों को निर्धारित समय दिया जाता है। एजेंसियों की मार्फत किसान को धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पेमेंट देने का प्रावधान है। मिलिंग के बाद चावल एफसीआई के गोदामों में जमा करवाना होता है। उस समय टुकड़े की मात्रा का प्रतिशत व कुछ प्रतिशत डिस्कलर दाना का पैमाना पास होने पर ही चावल जमा होता है।
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मंडी का गेट पकड़वा सकता है घपला
अनाज मंडी में धान की कुल आवक का रिकार्ड व गेट पास से पता चल सकता है कि धान किस किसान का है और किस एजेंसी के मार्फत राइस मिल में गया है। राइस मिल में मौजूदा स्टॉक कितना है। मंडी से गेट पास के मिलान के अलावा यदि और धान मिल में है तो उसका रिकार्ड जांचा जाए कि वह कहां से लाया गया। उसकी मार्केट कमेटी फीस दी गई है या नहीं। किस आढ़ती की फर्म की मार्फत किसान से धान खरीदा गया। मार्केट कमेटी ने गेट पास काटा या नहीं। उसका कंप्यूटर पर रिकार्ड चढ़ा या नहीं। राइस मिलों में बोरियों के चट्टे गिनकर अनुमान लगाने से घपला नहीं पकड़ा जा सकता।
डीएफएससी अनिल का कहना है कि जिले में तीन एजेंसियों ने सरकारी धान खरीदा है। 316 राइस मिलों को यह धान मिलिंग के लिए दिया हुआ है। यह काम मिलिंग कमेटी के अधीन होता है। उन्हें इसकी बाबत कुछ नहीं पता।
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