झगड़े में सिर में रॉड लगने से जख्मी लहूलुहान युवक। निगदू से तरावड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिको लीगल रिपोर्ट कटवाने और उपचार के लिए पहुंचा। वहां कोई स्वास्थ्य सुविधा न मिलने पर निराशा मिली। जख्म की पीड़ा से कराहते करनाल सामान्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर पहुंचा। यहां भी नियमों के आगे उसकी सुनवाई नहीं हुई। सिर पर खून से लथपथ पट्टी लपेटे कई घंटे चिकित्सक की तरफ ताकता रहा। आखिरकार कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की राह पकड़ी। वहां भी उपचार के लिए चिकित्सक का इंतजार करता रह गया। उपचार शुरू नहीं हुआ। लड़ाई-झगड़े में कैसे उसके सिर में चोट लगी, इसकी सच्चाई तो पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकती है, लेकिन इस स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। यदि तरावड़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ होती तो जख्मी युवक को इस हालत में ट्रामा सेंटर या मेडिकल कॉलेज नहीं जाना पड़ता।
मंगलवार को ट्रॉमा सेंटर पहुंचे निगदू के डेरा कप्तान राणा में रहने वाले रजत और उसके भतीजे दिनेश ने आपबीती सुनाई। रजत ने कहा कि वह सोमवार की रात बाइक पर सवार होकर साकरा रोड स्थित अपने डेरे पर जा रहा था। रास्ते में गांव के ही कुछ लोग ट्रक लिए राह में खड़े थे, जिनके साथ झगड़ा हुआ। उसका आरोप है कि हमलावरों ने उसके सिर में रॉड मारकर जख्मी कर दिया। उन्होंने हमले की सूचना निगदू थाना पुलिस को दी। उसके बाद वह उपचार करवाने और एमएलआर कटवाने के लिए तरावड़ी सीएचसी में पहुंचे। जहां उन्हें जवाब दे दिया गया। उसके बाद करनाल ट्रामा सेंटर में आए लेकिन यहां भी चिकित्सक ने जवाब दिया कि तरावड़ी पीएचसी से लिखवा कर लाएं, तभी आगामी कार्रवाई की जाएगी। थक हारकर मेडिकल कालेज पहुंचे। यहां भी उपचार शुरू नहीं हो सका।
नीलोखेड़ी और तरावड़ी स्वास्थ्य केंद्र इंचार्ज एसएमओ डॉ. प्रेमलता से इस मामले में बात करनी चाही लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इस संबंध में निगदू थाना प्रभारी सज्जन सिंह का कहना है कि गांव में दोनों पक्षों का आपसी झगड़ा हुआ है। गांव के प्रमुख लोगों के साथ दोनों पक्ष थाने में आए थे। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस की तरफ से किसी तरह की कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।