खट्टर साहब असी फांसी नहीं लगांवां तो और की करियै, तूसी ही दस दो। पहले
गेहूं मर गया, धान के रेट ने हमें मारा डाला। मंडियों में लूट मची है। धान
और किसान की बेकद्री हो रखी है, आपसे बड़ी उम्मीदें थी, पर रेट पूरे नहीं
मिले। 1300 रुपये लेकर जीरी का पर्चा 1450 का थमाया जा रहा है।
असी बर्बाद
हो गए सीएम साहब। ये दर्द और रोषभरे शब्द किसान जोगेंद्र सिंह ने प्रदेश के
मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सीधे संवाद में कहे। अकेले गुरविंद्र ने ही नहीं
मंडी में धान बेचने आए किसानों ने अपना दुखड़ा तल्ख शब्दों में सुनाया,
साथ ही सरकार की व्यवस्था और अधिकारियों की मिलीभगत पर भी निशाना साधा।
हालांकि, सीएम ने किसानों को अगले सीजन में बेहतर व्यवस्था का वादा जरूर
किया और बारी-बारी से किसानों के सवालों के जवाब दिए। दरअसल, करनाल से
पानीपत जाते समय सीएम काफिले के साथ अचानक डेढ़ बजे अनाज मंडी में पहुंचे
गए। सीएम सीधे एक किसान की ढेरी पर गए और उनसे बात की।
सीएम का काफिला
देखते ही मंडी में हड़कंप मच गया और अधिकारियों में भगदड़ मच गई, उधर,
किसान भी काफी संख्या में एकजुट हो गए। सीएम ने बारी बारी से ठेरी चेक की
और किसानों से बात की, लेकिन सभी किसानों ने एक ही समस्या बताई। सीएम के
सामने ही किसानों ने बताया कि मंडी में 1230 से 1350 रुपये प्रति क्विंटल
धान खरीदी जा रही है, जबकि कागजों में 1450 रुपये चढ़ाई जा रही है, जो
सरेआम धोखाधड़ी है। किसानों ने आढ़तियों और अधिकारियों की मिलीभगत की भी
पोल खोली।
नमी आई अलग-अलग
अनाजमंडी में सबसे बड़ी समस्या नमी
रही। सीएम ने कहा कि 17 प्रतिशत नमी वाली धान का रेट 1450 रुपये मिलेगा।
किसान जानबूझकर रात को धान कटवाते हैं, ताकि नमी की मात्रा 4 से 5 प्रतिशत
बढ़ जाए। नमी मापने वाली मशीनों से जब नमी मापी गई तो एक पहली जांच में नमी
22.8 प्रतिशत आई और दूसरी मशीन से इस धान की नमी 24 प्रतिशत मिली। ऐसे में
किसानों के आरोपों को भी बल मिला कि मशीन में गड़बड़ी है। हालांकि, सीएम
ने इसे गंभीर मानते हुए मशीनों के ठीक कराने के आदेश दिए। इसके अलावा सीएम
ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि अगर कहीं गड़बड़ी पकड़ी गई तो उसे
बख्शा नहीं जाएगा। प्राथमिकता के आधार पर खरीद करें और टालमटोल न करें,
नहीं तो खैर नहीं है।
यूपी का धान करा रहा हमारी बेकद्री
गांव
कुटेल वासी किसान कर्म सिंह ने पहली ही ढेरी पर सीएम को बताया कि यूपी का
धान खुला बिक रहा है। व्यापारी यूपी से खरीदकर लाते हैं और खरीद एजेंसियां
इन्ही का धान खरीद रही हैं। किसान की ठेरी तीन से चार दिन में बिक रही है।
यूपी के धान के खरीद में सवाल जवाब नहीं होता। इसलिए खरीद एजेंसियों का
आंकड़ा यूपी के धान से बढ़ रहा है। सीएम ने इसे गंभीर मानते हुए एसपी को
आदेश दिए कि यूपी के धान के ट्रक नहीं आएंगे, केवल किसान ही धान बेचने आ
सकता है।
दाम 1450 रुपये और खरीदी जा रही 1250 रुपये
किसान
गुरविंद्र सिंह, राम सिंह ने कहा कि कुंजपुरा मंडी में धान सही बिक रही है,
करनाल मंडी में दिक्कत आ रही है। यहां पर कागजों में 1450 रुपये चढ़ाते
हैं, जबकि किसान को 1250 से 1300 रुपये देते हैं। धान में नमी की मात्रा
अधिक बताकर किसानों से औने-पौने दाम में धान ले रहे हैं। खरीद एजेंसी नमी
को मशीन से चेक नहीं करते और तुका लगाकर नमी अधिक बता देते हैं।
सीएम के सामने अफसर की खोली पोल
किसान
संदीप ने कहा कि सीएम साहब मैं भाजपा का 15 साल से कार्यकर्ता हूं। धान को
बिल्कुल सुखाकर लेकर आया हूं, इसके बाद भी नमी की मात्रा अधिक बताते रहे।
मार्केट कमेटी के सचिव को नमी की मात्रा चेक करवाने के लिए गिड़गिड़ाते
रहे, लेकिन नमी की मात्रा चेक नहीं की। सारी बात सुनने के बाद सीएम चुप रहे
और बोले यहां पर मैं सीएम हूं और यहां भाजपा की बात सुनने नहीं, किसानों
की बात सुनने आए हैं। इस पर संदीप बोला कि मैं भी किसान हूं।