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सुबह से दवा के लिए भटकते रहे मरीज

Thu, 15 Oct 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
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एक तो पहले ही डेंगू, मलेरिया और टायफाइड का सीजन चल रहा है, दूसरी तरफ अचानक हुई दवा विक्रेताओं की हड़ताल ने सभी मरीजों को परेशानी में डाल दिया। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में बुधवार दिनभर ओपीडी चली। दवाओं के सभी काउंटर खुले रहे, लेकिन कुछ दवाएं ऐसी थी जो मेडिकल कॉलेज के काउंटर पर नहीं मिलीं। रूटीन में भी कुछ दवाएं बाहर से लिखी होती हैं। जिन्हें मरीज बाहर से लेकर आते हैं।
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लेकिन आज सभी केमिस्ट की दुकानें बंद होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दवाएं न मिलने के कारण मरीजों को दर-दर भटकना पड़ा। मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर किसी ने महंगी दवा दी तो कई केमिस्ट संचालकों ने गिड़गिड़ाने के बाद भी दवा नहीं दी। बुधवार को दवा की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ भारत के समस्त दवा विक्रेताओं का देश व्यापी बंद का असर रहा। देशभर के करीब आठ लाख केमिस्ट हड़ताल पर रहे। दवा विक्रेताओं के अनुसार ड्रग एंड केमिस्ट एक्ट 1940 के तहत दवा ऑनलाइन बिक्री अवैध है। शहर के  महाबीर दल अस्पताल के सामने केमिस्ट संचालकों ने एकत्रित होकर विरोध जताया।

सुबह से रहे हड़ताल पर
सीएम सिटी में भी सभी दवा विक्रेता सुबह से ही हड़ताल पर रहे और मांगों के लिए नारेबाजी करते रहे। कानून के जानकारों का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार इस तरह से दवा विक्रेता हड़ताल पर नहीं जा सकते। हड़ताल की वजह से मरीज और उनके परिजन दवा लेने के लिए दर दर की ठोकरें खाते रहे। मरीजों ने कहा कि कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हर प्रकार की दवाएं नहीं मिलतीं। ऐसे में बाहर से दवाएं लेकर आना पड़ता है।   
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मरीजों ने रोया दुखड़ा
दवा न मिलने से मरीज व इनके परिजनों ने दुखड़ा रोया। दवाई के लिए दर-दर भटकते रहे, लेकिन दवा नहीं मिली। पुंडरी वासी महिला सोनी ने बताया कि उनके बेटे को डेंगू है और वह सीरियस है। दवाई नहीं मिलने से परेशानी आ रही है, वहीं गोगड़ीपुर के रविंद्र का कहना है कि उनकी बहन की डिलीवरी थी। इस दौरान डॉक्टर ने इमरजेंसी में बाहर की दवाई लिख दी। दो घंटे के बाद एक केमिस्ट संचालक ने काफी मिन्नत करने के बाद दी।

अस्पतालों के अंदर खुली रही केमिस्ट दुकानें
केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर देशभर में बंद का असर रहा, लेकिन निजी अस्पतालों के अंदर केमिस्ट की दुकानें खुली रहीं। अस्पतालों के अंदर खुली केमिस्ट की दुकानों को लेकर एसोसिएशन ने रोष व्यक्त किया है। एसोसिएशन का कहना है कि एक आवाज पर सभी केमिस्ट की दुकानें बंद हो जानी चाहिए थी, जिससे सरकार पर भी दबाव बने। दवाएं लेने पहुंचे सेक्टर-14 वासी ज्ञान सिंह का कहना है कि कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में काउंटर खुला था, लेकिन डॉक्टर ने जो दवाएं लिखी थी वह वहां पर नहीं मिली। बाहर गए तो वहां पर भी केमिस्टों की दुकानें बंद थीं। ऐसे में उन्हें दवाएं नहीं मिलीं। गांव कलरी जागीर वासी ललित ने बताया कि उनके मरीज को कई दिनों से बुखार है। डॉक्टरों ने दवाएं लिख दी, लेकिन केमिस्ट एसोसिएशन की हड़ताल के कारण वह दवाएं के लिए दर-दर भटकते रहे। उन्हें दवाएं नहीं मिली। दवाएं नहीं मिलने से उनका मरीज तड़पता रहा। गांव बुड्ढनपुर से दवाएं लेने के लिए आई महिला आशा रानी ने बताया कि दवाएं नहीं मिलने के कारण वह भटकती रही। किसी ने बताया कि निजी अस्पतालों के अंदर केमिस्ट की दुकानें खुली हैं, वहां से दवाएं मिल जाएंगी। वह वहां पर गई, उन्हें दवाएं तो मिल गई, लेकिन महंगे दामों पर मिली। बड़ा गांव वासी कलावती ने बताया कि वह मेडिकल स्टोर से दवा लेने के लिए गई तो सभी बंद थे। निजी अस्पतालों के अंदर खुली केमिस्ट की दुकानों से महंगी दवाएं मिलीं। रेट में कोई छूट नहीं दी गई। प्रिंट रेट पर दवाएं बेची गईं।

ऑनलाइन दवा के गिनवाए नुकसान
केंद्र सरकार की ऑनलाइन दवा बेचने के खिलाफ देशभर के दवा विक्रेता दुकानदार हड़ताल पर हैं। केमिस्टों को मानना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से दवा के गलत इस्तेमाल किया जा सकता है और मरीजों को भी उचित दवा नहीं मिल पाएगी। करनाल केमिस्ट एसोसिएशन के जिला प्रधान अरविंद्र अत्रेजा ने बताया कि इस प्रक्रिया से एक तरफ जहां मरीजों को सही दवा नहीं मिलेगी तो दूसरी तरफ वहीं केमिस्टों के व्यापार भी खासा असर पड़ेगा। एसोसिएशन के सचिव सरोवर आनंद ने बताया कि जिले में स्थित सभी अस्पतालों में बनी डिस्पेंसरियों में आपातकाल दवा देने का उचित प्रबंध किया हुआ है। इसके अलावा एसोसिएशन के अन्य सदस्य शैलेंद्र नंदवानी ने बताया कि किसी भी केमिस्ट से जबरदस्ती दुकानें बंद नहीं करवाई जा रही है, बल्कि सभी अपनी मर्जी से दुकानें बंद कर रहे हैं। उधर, बीमार बच्चे की दवा लेने पहुंचे सुभाष कुमार का कहना है कि वह सुबह से ही शहरभर में दवा खरीदने के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं पर भी कोई दुकान खुली न होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुगर की दवा लेने पहुंचे बुजुर्ग सुभाष चावला ने भी बताया कि वह भी शहरभर में कई जगहों पर गए, लेकिन कहीं भी कोई दुकान खुली न होने के कारण काफी परेशानी हुई।
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