अपनी बेबाकी के लिए प्रसिद्ध करनाल के सांसद अश्विनी चोपड़ा का विवाद साथ
नहीं छोड़ रहे हैं। रविवार को शहर में दो कार्यक्रमों में सांसद चोपड़ा
सीएम मनोहर लाल के साथ दिखे। इसके बाद नगर निगम द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय
स्वच्छता कार्यक्रम से सांसद ने दूरी बना ली। रविवार को सीएम मनोहर लाल
श्री घंटाकर्ण महावीर देव तीर्थस्थान के चतुर्थ वार्षिक दिवस पर मुख्य
अतिथि के तौर पर पहुंचे।
इस दौरान सांसद चोपड़ा भी वहां मौजूद रहे। सीएम के
साथ एक तरफ सीपीएस बख्शीश सिंह बैैठे तो दूसरी तरफ आरएसएस के वरिष्ठ
पदाधिकारी इंद्रेश कुमार के साथ ही सांसद बैठे। सीपीएस बख्शीश सिंह ने कई
बार सांसद को अपने स्थान पर सीएम के साथ बैठने के लिए कहा, पर उन्होंने
इंकार कर दिया। जब इंद्रेश कुमार मंच पर संबोधन के लिए गए तो बीच की सीट
खाली हो गई, इस पर सीएम ने सांसद को अपनी तरफ आने का इशारा किया। इसके बाद
सांसद सीएम के पास बैठ गए। दोनों नेताओं ने कुछ देर के लिए बात भी की और
हल्की मुस्कान भी बिखेरी। इसके बाद दोनों नेता भाजपा नेता चंद्रप्रकाश
कथूरिया के पिता की रस्म क्रिया में भी शामिल हुए।
दोपहर बाद एनडीआरआई में
स्थानीय शहरी निकाय विभाग द्वारा राज्यस्तरीय स्वच्छता समारोह आयोजित किया
गया, इसमें सीएम मुख्य अतिथि रहे, लेकिन सांसद अश्विनी चोपड़ा ने इस
कार्यक्रम में शिरकत नहीं की। सांसद के स्टाफ ने बताया कि कार्यक्रम के
कार्ड पर न तो सांसद का नाम है और न ही मंच पर सांसद के लिए स्थान तय किया
गया था, इसलिए वे कार्यक्रम में नहीं गए। ऐसे में फिर से सांसद चोपड़ा ने
अपने तेवर जाहिर कर दिए।
पार्षदों ने स्वच्छता कार्यक्रम में जाना उचित नहीं समझा
राज्यस्तरीय
स्वच्छता कार्यक्रम के लिए शहरी स्थानीय विभाग ने पूरे प्रयास किए, लेकिन
जिनके कंधे पर सफाई अभियान की जिम्मेदारी है, उन्होंने ही कार्यक्रम से
दूरी बना ली। कार्यक्रम में नगर निगम की मेयर रेणु बाला गुप्ता, सीनियर
डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग व डिप्टी मेयर मनोज वधवा व एक-दो पार्षद ही नजर आए,
बाकी ने विरोध स्वरूप कार्यक्रम से किनारा कर लिया। पार्षद बलविंद्र सिंह
ने बताया कि किसी भी कार्यक्रम में न तो पार्षदों का मान सम्मान होता है और
न ही उन्हें सीट मिलती है, ऐसे में वे कार्यक्रम से दूर ही रहें। उन्होंने
दावा किया कि कई पार्षदों को इस बात से नाराजगी है और इसलिए वे भी
कार्यक्रम में नहीं आए।