‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम ऐसे हो हमारे करम नेकी पर चले और बदी से टलें ताकि हंसते हुए निकले दम’...। यह गीत आजकल करनाल के जिला जेल में गूंज रहा है।
जेल में संगीन जुर्मों में बंद कैदियों ने एक म्यूजिकल बैंड का गठन किया है। इसके माध्यम से वे देशभक्ति और धार्मिक गीत गाकर अन्य कैदियों को अच्छे कर्म करने का संदेश दे रहे हैं। 26 जनवरी 2017 के अवसर पर जेल महानिदेशक यशपाल सिघंल की ओर से एक संस्था के सौजन्य से संगीत के लगभग ढाई लाख का साजोसामान उपलब्ध करवाया गया था।
इसके बाद जेल में हत्या, अपहरण जैसे कई संगीन जुर्मों में बंद कैदियों ने खुद के म्यूजिकल बैंड का गठन किया। जेल अधीक्षक शेर सिंह ने बताया गीत व संगीत बंधन में बंद कैदी व हवालाती के तनाव व हताशा को कम करती है तथा और जीवन को सकारात्मक जीने की कला भी सिखाती है। जेल में लंबे समय से बंद कैदी व बंदी निराशा, कुंठा व नकारात्मक तनाव से भर जाते हैं। इसलिए यह म्यूजिक बैंड इन कैदियों के लिए एक आशा की किरण है।
करनाल के प्रसिद्ध सागर म्यूजिक ग्रुप भी इन बंदियों को और अधिक निपुण करने का प्रशिक्षण देगा ताकि वे बाहर जाकर रोजगार पाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। म्यूजिकल बैंड के विभिन्न यंत्रों के प्रशिक्षण के लिए लगभग 50 बंदियों को चुना गया है। इनमें कुछ संगीत शिक्षक व गायिकी में पहले से प्रशिक्षित हैं। ये इन संगीत यंत्र बजाने में व सिखाने में अन्य बंदियों की सहायता कर रहे हैं। कई बंदी ऑटोपेड, ओरगन, तबला, हारमोनियम, ड्रमसेट, ढोलक, पंजाबी ढोल, कांगो, पीटी ड्रम, बांसुरी, झांझ व बिगुल बजाकर अपना व दूसरे बंदियों का मनोरंजन कर रहे हैं।