माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अगर आप पशुपालक हैं और अपनी गाय से विदेशी नस्ल के मुताबिक दूध और स्वदेशी नस्ल के मुताबिक मौसम सहने और रोगों से लड़ने की क्षमता वाली गुणवत्ता चाहिए तो एनडीआरआई के काउंटर खुले हैं। यहां आपको एनडीआरआई के वैज्ञानिकों की 40 साल की मेहनत से तैयार कर्ण फ्रिज का सीमन मिल जाएगा। एनडीआरआई के पास इस सीमन का करीब चार लाख का स्टॉक उपलब्ध है। इसे आप बेहद किफायती दाम पर ले सकते हैं। इस सीमन को आप अपने गाय में इंजेक्ट कर पशु की होने वाली नस्ल को सुधार सकते हैं। विशेष तौर पर ये सीमन थारपारकर गाय के लिए बेहद सार्थक माना गया है।
हॉलैंड के दूधारू नस्ल होल्स्टीन फ्राइजिय और स्वदेशी थारपारकर नस्ल की मिक्स ब्रिडिंग से तैयार कर्ण फ्रिज को अब देश की गाय का दर्जा भी मिल चुका है। ये गाय प्रतिदिन 46 लीटर तक दूध देती है। इसमें देश के मौसम को सहने की क्षमता, बीमारियों से लड़ने के गुण के साथ विदेशी दुधारू गाय के दुग्ध उत्पादन की बेहतरीन क्षमता है। हालांकि ये नस्ल हरियाणा पंजाब में काफी जा चुकी है जिसे किसान और पशुपालक खुलकर अपना रहे हैं। अब इसकी डिमांड नेपाल और बर्मा तक हो रही है। इस गाय के दूध में फैट की मात्रा भी देशी गाय के दूध के बराबर है। यानी ये गाय दूध भी ज्यादा देगी, इसके दूध की गुणवत्ता भी बेहतरीन होगी, इसमें देश के मौसम और पर्यावरण के अनुसार ढलने की क्षमता भी होगी।
एनडीआरआई के वैज्ञानिकों ने बताया कि इस शोध से विकसित इस गाय का नाम कर्ण नगरी से कर्ण रखा गया और हॉलैंड के होल्स्टीन फ्राइजियन नस्ल से फ्रिज लिया गया। जिसके समावेश से इसका नाम कर्ण फ्रिज रखा गया है। इसकी विशेषता ये है कि ये काले और सफेद रंग की चमड़ी, कूबड़ की अनुपस्थिति और गर्म-आर्द्र उपोष्ण कटिबंधीय परिस्थितियों के लिए उत्कृष्ट अनुकूलन क्षमता रखती है। कर्ण फ्रिज की दूध उत्पादन क्षमता देश की अधिकांश स्वदेशी मवेशी नस्लों की दूध उत्पादन क्षमता से दोगुनी है। ये गाय प्रति स्तनपान औसतन 3,550 किलोग्राम दूध देती है। इसमें शीर्ष प्रदर्शन करने वाली गाय 305 दिनों में 5,851 किलोग्राम और प्रति दिन 46.5 किलोग्राम दूध तक दे सकती है।
40 साल की ये बड़ी उपलब्धि : निदेशक
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि आईसीएआर राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान ने उच्च दूध उत्पादन और उष्ण कटिबंधीय अनुकूलन क्षमता वाली सिंथेटिक मवेशी नस्ल कर्ण फ्रिज गाय विकसित की है। ये गाय भारत के डेयरी आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम में एक मील का पत्थर होगी। कर्ण फ्रिज को होल्स्टीन फ्राइजियन (विश्व स्तर पर जानी जाने वाली उच्च दूध देने वाली नस्ल) और एक मजबूत स्वदेशी जेबू नस्ल थारपारकर गाय की व्यवस्थित क्रॉस ब्रीडिंग के माध्यम से विकसित किया गया है। कई पीढ़ियों की इंटर-से ब्रीडिंग के बाद अब यह आबादी स्थिर हो गई है। इसके लिए संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा चार दशकों से अधिक प्रयास के बाद डेयरी जर्मप्लाज्म (कर्ण फ्रिज नस्ल) का विकास किया है।
इस गाय की नस्ल अब भारत की कृषि जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल है और देश के क्रॉस-ब्रीड मवेशी सुधार के लिए एक आधार स्टॉक के रूप में कार्य कर सकती है। यह नस्ल देसी जेनेटिक संसाधनों के संरक्षण और अग्रिम ब्रीडिंग तरीकों का इस्तेमाल करके उत्पादकता बढ़ाने के बीच एक बेहतरीन तालमेल को दिखाती है। फिलहाल इस गाय की नस्ल हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, कैथल, जींद और यमुना नगर जिलों में जा चुकी हैं। अब नेपाल और बर्मा में भी इसकी डिमांड बढ़ रही है। इसके सीमन को एनडीआरआई के काउंटर से लिया जा सकता है।
- डॉ. विकास वोहरा, प्रमुख वैज्ञानिक, पशु आनुवंशिकी और प्रजनन प्रभाग, एनडीआरआई