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जल्द ही भव्य नजर आएगा कर्ण ताल

Wed, 07 Sep 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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जायजा लेते ओएसडी व अन्य - फोटो : अमर उजाला
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महाभारत के पराक्रमी योद्धा दानवीर कर्ण के नाम से प्रसिद्ध कर्णताल के नवीनीकरण कार्य की प्रगति देखने के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरेंद्र सिंह, मेयर रेनू बाला गुप्ता तथा नगर निगम आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने कार्यस्थल का दौरा किया और अब तक हुई प्रगति का जायजा लिया।
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बता दें कि लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से हुडा द्वारा बनाए जा रहे भव्य कर्णताल का 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष दस प्रतिशत सिविल कार्य को शीघ्र निपटाने के लिए ओएसडी ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कर्णताल से जहां एक ओर करनाल के लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं, वहीं इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।

वर्षों से करनाल के लोगों की मांग थी कि इसका नवीनीकरण कर इसे भव्य स्वरूप दिया जाए और इसे एक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जाए, लेकिन इस ओर पूर्व में किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री बनते ही इसे भव्य बनाने की घोषणा कर दी और इस पर बीती जुलाई में काम शुरू हो गया था। उन्होंने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि वर्षों से उपेक्षित कर्णताल नए स्वरूप में आएगा, यह केवल सपना मात्र था, जो अब साकार हो गया है।
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साढ़े तीन में फैला है कर्ण ताल
ज्ञात हो कि करीब साढ़े तीन एकड़ क्षेत्र में फैले कर्णताल का डिजाइन हुडा के ही चीफ आर्किटेक्ट द्वारा तैयार किया गया था। इसमें अकेले 2280 वर्ग मीटर की वाटर बॉडी बनाई गई है, ताकि ताल का स्वरूप बना रहे। इसके अतिरिक्त बच्चों के मनोरंजन के लिए किश्ती, एक रेस्टोरेंट, 6 बूथ जिनमें महाभारत से जुड़ी काष्ठ निर्मित मूर्तियों का संग्रहालय तथा पुस्तकें रखी जाएंगी। तीन पार्किंग, जोगिंग ट्रैक, वाटरबॉडी के साथ लगता 14 फुट का फुटपाथ, बुजुर्गों व पार्क में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों के टहलने के लिए 6 फुट का अलग से फुटपाथ बनाया गया है।

सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र दानवीर योद्धा महाराजा कर्ण की विशाल प्रतिमा है, जो यहां आने वाले दर्शकों को दूर से ही आकर्षित करेगी। वाटरबॉडी में पानी के लिए पार्क का अपना नलकूप होगा। बेकार जल को निकालने के लिए हारवेस्टिंग व स्टोरम वाटर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। ओएसडी के दौरे में समाजसेवी बृज गुप्ता, नगर पार्षद सुदर्शन कालड़ा, नरेंद्र पंडित व भगवान दास अग्घी भी थे।
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