संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेक्टर नौ में जगदंबा मां सरस्वती का स्मृति दिवस मनाया गया, जिसमें चंडीगढ़ से पहुंचे भ्राता अनिल ने कहा कि हमने बचपन से जगदंबा मां का पालन लिया है। उनकी गोदी में बैठे हैं, उन्होंने प्यार से हमें प्रभु प्रसाद खिलाया है। वह सदा अनासक्त वृत्ति से रहीं, संसार में रहते हुए भी संसार से न्यारी और प्यारी रहीं। इसीलिए वह सब की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली कामधेनु बन गईं।
उन्होंने कहा कि कभी कोई व्यक्ति या वस्तु ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित नहीं किया। ऐसे हमें भी अनासक्त भाव धारण करना है। माया कितने भी चमकीले रूप में आए, हमें किसी भी रूप में आसक्त नहीं होना है। मां का हृदय विशाल था। उन्हें कभी छोटी मोटी बातों को दिल पर नहीं लिया। ब्रह्माकुमारी निर्मल दीदी ने कहा कि मां अपने सत्य स्वरूप में सदा स्थित रहकर पवित्रता की देवी बन गईं। उनके सामने कोई अपवित्र आत्मा ठहर नहीं सकती थी। उनकी दृष्टि में पवित्रता की ऐसी शक्ति थी, जिसे से आसुरी संस्कार वाली आत्माओं के अशुद्ध संकल्प भी परिवर्तन हो जाते।