- दयाल सिंह कॉलेज में हुए सम्मेलन में कवियों ने रचनाएं पेश कर बांधा समां, सामाजिक मुद्दों पर किया कटाक्ष
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हुई पैदा इस माटी में ये अभिमान है, मिली मां भारती की गोद ये सम्मान है... और फूल बनकर महकना, गीत सुख के गुनगुनाना जिंदगी है, गम के बादल आएंगे और जाएंगे,
गम भुला कर मुस्कुराना जिंदगी है...। ऐसी ही तमाम कविताएं पेश कर कवियों ने समां बांधा। साथ ही सामाजिक मुद्दों पर भी प्रहार किया और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति में रहकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मौका था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में दयाल सिंह कॉलेज में आयोजित कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी (उर्दू प्रकोष्ठ) के सहयोग से हुए आयोजन में मुख्य अतिथि रंगकर्मी एवं साहित्यकार रेशमा कल्याण ‘मीरा’ ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज का दर्पण होते हैं, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।
उन्होंने अपनी कविता गृहिणी और बंजर का पाठ करते हुए नारी के संघर्ष, समर्पण और सहनशीलता को मार्मिक शब्दों में प्रस्तुत किया। चूल्हे की आंच में जलती रही, फिर भी उजालों की आस रही, अपनों के सपनों में ढलती रही, खुद के लिए न कोई सांस रही। कविता सुनाते हुए कहा कि धरती सी कोमल, मगर बंजर बनी, उम्मीदों के बीज भी सूख गए, स्नेह की बारिश को तरसती रही, कुछ सपने आंखों में धूल गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रिंसिपल डॉ. आशीमा गक्खड़ ने की।
छह महिलाओं को किया सम्मानित
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। इनमें जिला शिक्षा अधिकारी सुदेश ठुकराल, दादूपुर रोड़ान कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अनिता जून, केवीए डीएवी कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. मीनू शर्मा, डॉ. गणेशदास शिक्षण संस्थान की प्रिंसिपल डॉ. राकेश संधू, कॉलेज प्रबंधन समिति से डॉ. नीना अरोड़ा और डॉ. पंपा सेन गुप्ता शामिल हैं। इस दौरान प्रश्नोत्तरी और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ।
हास्य और व्यंग्यों पर गुदगुदाए श्रोता
कार्यक्रम में रचनाएं सुनकर कई बार सभागार श्रोताओं की तालियों से गूंज उठा। कवि चरणजीत चरण, विनीत पांडेय, दिनेश शर्मा, राधाकांत पांडेय, मेघश्याम मेघ व कवयित्री अनामिका वालिया शर्मा ने कविताओं से समां बांधा। चरणजीत ‘चरण’ ने साहित्य, समाज, राजनीति, संस्कृति और नैतिकता को केंद्र में रखकर अपने भावनात्मक और प्रभावशाली छंदों से सभी को प्रभावित किया। विनीत पांडेय ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। दिनेश शर्मा ने देशभक्ति पर आधारित प्रस्तुति दी।