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Karnal News: बीमारी छिपाकर ली गई बीमा पॉलिसी धोखाधड़ी, कंपनी क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं

Mon, 16 Mar 2026 02:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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करनाल।
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा और लोन सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अगर पॉलिसी लेते समय महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाई जाती है तो इसे बीमा कंपनी के साथ धोखाधड़ी माना जाएगा। आयोग ने मृतक के वारिसों की ओर से दायर उस शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बैंक लोन माफ करने और बीमा क्लेम दिलाने की मांग की थी।

असंध के जभाला गांव निवासी राजो देवी और उनके बेटे सतनाम ने आवास फाइनेंसर्स लिमिटेड और भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत अनुसार राजो देवी के पति जीता ने जनवरी 2021 में 4.90 लाख रुपये का होम लोन लिया था। लोन की सुरक्षा के लिए बैंक ने एक जीवन बीमा पॉलिसी भी जारी की थी ताकि मृत्यु की स्थिति में परिवार पर कर्ज का बोझ न पड़े। अक्तूबर 2022 में जीता की मृत्यु हो गई। इसके बाद परिवार ने बैंक से लोन बंद करने और बीमा कंपनी से क्लेम देने का अनुरोध किया।
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बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि मृतक पहले से ही गंभीर लिवर की बीमारी (क्रोनिक लिवर डिजीज) से ग्रसित थे, जिसे उन्होंने पॉलिसी लेते समय छिपाया था। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पॉलिसी लेने से लगभग एक साल पहले बीमा धारक जीता मार्च, 2020 से लिवर की बीमारी का इलाज करा रहे थे।
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बुनियादी शर्तों का उल्लंघन
आयोग ने माना कि पॉलिसी फॉर्म भरते समय न का विकल्प चुनकर बीमारी की जानकारी छिपाई गई, जो परम सद्भाव के सिद्धांत का उल्लंघन है। बैंक ने केवल एक मध्यस्थ के रूप में कार्य किया था, इसलिए बीमा क्लेम की विफलता के लिए बैंक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जब बीमा अनुबंध की बुनियादी शर्तों का ही उल्लंघन किया गया हो तो सेवा में कोई कमी नहीं मानी जा सकती। इसके साथ ही आयोग ने पीड़ितों की याचिका को बिना किसी राहत के खारिज कर दिया।
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