संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने महेश चावल मिल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को दावों के भुगतान में कमी का दोषी पाया है। अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि वह मिल को पांच लाख 78 हजार 874 रुपये की दावा राशि नौ प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करे।
तरावड़ी स्थित महेश राइस मिल ने 10 जनवरी, 2021 को 400 बैग बासमती चावल का ट्रक गुजरात के गांधीधाम के लिए रवाना किया था। चावल की कीमत करीब 10 लाख 98 हजार 824 रुपये थी। मिल से निकलने के कुछ ही देर बाद तरावड़ी के पास ट्रक पलटकर नाले में गिर गया। सारा चावल भीगकर खराब हो गया। मिल के पास कंपनी की मरीन कार्गो ओपन पॉलिसी थी, जिसके तहत उन्होंने नुकसान की भरपाई के लिए दावा पेश किया।
बीमा कंपनी ने दावा यह कहकर खारिज कर दिया था कि पॉलिसी हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और यूपी जैसे राज्यों में होने वाले नुकसान को कवर नहीं करती। इसके अलावा कंपनी ने वाहन के परमिट और रूट बदलने जैसे तकनीकी कारणों का हवाला देकर दावे को नो क्लेम घोषित कर दिया था।
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि गंतव्य महत्वपूर्ण है। माल गुजरात भेजा जा रहा था न कि स्थानीय राज्यों के लिए। इसलिए यह पॉलिसी के दायरे में आता है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने केवल धारणाओं और तकनीकी कमियों के आधार पर दावा रद्द किया, जो कानून की नजर में गलत है। कंपनी के सर्वेक्षक ने 400 में से 200 बैग के नुकसान का आकलन किया था, जिसकी कीमत पांच लाख 78 हजार 874 रुपये थी, जिसे आयोग ने सही माना।
5.78 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश
आयोग ने कंपनी को पांच लाख 78 हजार 874 रुपये (25 मार्च 2021 से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ) देने के आदेश दिए। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के तौर पर 25 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमा खर्च के रूप में 11 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि बीमा कंपनियां अक्सर प्रीमियम लेने में तो आगे रहती हैं लेकिन जब असली हकदार को दावा देने की बारी आती है, तो वे नियम-शर्तों का बहाना बनाकर इससे बचने की कोशिश करती हैं।