संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा दावे के भुगतान में मनमानी कटौती पर स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को रोकी गई राशि दो लाख 42 हजार 756 रुपये को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करे। साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
तरावड़ी निवासी 62 वर्षीय राकेश कुमार ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से पांच लाख रुपये की ‘मेडिक्लासिक’ पॉलिसी ली थी। नवंबर, 2024 में उन्हें प्रोस्टेट संबंधी बीमारी के कारण मोहाली के एक निजी अस्पताल में दाखिल होना पड़ा। अस्पताल ने इलाज के लिए तीन लाख 32 हजार 756 रुपये का बिल बनाया लेकिन बीमा कंपनी ने कैशलेस सुविधा के तहत केवल 70 हजार रुपये ही मंजूर किए। कंपनी ने तर्क दिया कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार संबंधित बीमारी के लिए यही अधिकतम देय राशि है। राकेश कुमार ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
कंपनी नहीं बता पाई ठोस कारण
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी कटौती के ठोस कारण बताने में विफल रही। आयोग ने कहा कि आजकल बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में तो रुचि दिखाती हैं, लेकिन क्लेम देने के समय तकनीकी खामियां निकालकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करती हैं। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी दो लाख 42 हजार 756 रुपये शिकायतकर्ता को क्लेम अस्वीकार करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दे। 45 दिन में ऐसा करना होगा।